Wednesday, December 2, 2015

अभेद्य रहा है वेलोर का किला

महालक्ष्मी मंदिर के दर्शन के बाद हम वापसी को चल पड़े हैं। हमारी ट्रेन काटपाडी जंक्शन से है चेन्नई के लिए वैगेई एक्सप्रेस। श्रीपुरम से काटपाडी कोई 18 किलोमीटर है आटोवाले 180 रुपये मांग रहे हैं। हमें सलाह दी गई थी, कि बस से न्यू बस स्टैंड पहुंचे फिर वहां से दूसरी बस लें। हमें मंदिर के मुख्य द्वार के बाहर से न्यू बस स्टैंड के लिए बस मिल गई। बस पूरे वेलोर शहर के चक्कर काटती हुई न्यू बस स्टैंड पहुंचती है। रास्ते में आता है वेलोर का किला यानी वेलोर फोर्ट।

शहर के बीचों बीच स्थित वेलोर का किला दक्षिण भारत में ऐसे किलों शामिल है जो सुरक्षा के लिहाज से शानदार रणनीति के तहत बनाया गया था। किले के चारों तरफ विशाल तालाब है। सबसे अच्छी बात है कि ये तालाब आज भी बेहतर हालात में है। इसका पानी स्वच्छ और निर्मल दिखाई देता है। ये किला कब बना इसको लेकर कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिलता है पर माना जाता है कि ये किला 16वीं सदी का है। इसे विजयनगर के राजाओं ने बनवाया था। 1526 से 1595 के बीच शासन करने वाले वोमी नायक के समय इस किले के निर्माण का उद्धरण मिलता है।  वेलोर अंग्रेज और फ्रेंच लोगों के बीच लड़े गए कई युद्धों का भी साक्षी शहर रहा है।

 आंबुर (1749), आरकोट (1751) और वानडिवासी (1760) के युद्ध वेलोर की धरती पर लड़े गए। ब्रिटिश शासन काल में टीपू सुलतान के परिवार को वेलोर किले में कैदी के तौर पर रखा गया था। यह किला विजयनगर के बाद बीजापुर, मराठा, मुगल और अंत में ब्रिटिश शासन के अधीन रहा। किले के अंदर टीपू महल, हैदर महल, कैन्डी महल देखे जा सकते हैं।
वेलोर शहर की खासियत है कि ये दक्षिण के राज्य कर्नाटक, केरल और आंध्र से सड़क और रेलमार्ग से भली प्रकार जुड़ा हुआ है। यह रेल और सड़क मार्ग का प्रमुख जंक्शन है। यहां से आपको कहीं भी जाने के लिए बस और ट्रेन मिल सकती है।

जलकंडेश्वर मंदिर – वेलोर किले के अंदर जलकंडेश्वर मंदिर स्थित है। यह विजयनगर राजाओं के कला शिल्प और स्थापत्य का प्रतिनिधि मंदिर है। ये महादेव शिव का मंदिर है जो अब भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण के अधीन है। मंदिर के बारे में कहा जाता है कि चिन्ना बोमी नायक को स्वप्न में शिव ने दर्शन दिए जिसके बाद इस मंदिर का निर्माण कराया गया।

वेलोर सेंट्रल जेल का भी अपना ऐतिहासिक महत्व है। 1830 में बने इस जेल में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राजागोपालचारी, के कामराज, सी अन्नादुर्रै, वी वी गिरी जैसे लोग जेल काट चुके हैं। वेलोर का दूसरा बड़ा आकर्षण है क्रिश्चियन मेडिकल कालेज। इसकी स्थापना सन 1900 में हुआ। धीरे धीरे अस्पताल बड़ा आकार लेता गया। आज यह देश के सबसे सम्मानित और इमानदारी से ऊपचार करने वाले अस्पतालों में गिना जाता है।

हम शहर घूमते हुए न्यू बस स्टैंड से आटो रिक्शा करके काटपाडी जंक्शन पहुंच जाते हैं। काटपाडी जंक्शन से बिहार और यूपी की ओर जाने वाले सभी ट्रेने महीनों पहले से भरी रहती हैं। इन सभी ट्रेनों  सीएमसी वेलोर में उपचार कराने आने वाले मरीज और उनके तिमारदार भरे होते हैं।
 अपनी ट्रेन का इंतजार करते हुए हमारी ऐसे कई परिवारों से मुलाकात होती है। बातों बातों में हमारी ट्रेन का भी समय हो जाता है। खाने का समय  हो गया है इसलिए मैं स्टेशन की कैंटीन से बिरयानी पैकेट खरीद कर अपने कोच की ओर बढ़ता हूं।
 - vidyutp@gmail.com

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