Friday, December 18, 2015

चांदनी चौक की गलियों का स्वाद – जयतारा स्वीट्स

वैसे तो पुरानी दिल्ली की जिस गली से आप गुजरें उसकी कुछ खास बात जरूर है। पर हम जा पहुंचे सोने चांदी के गहने बेचने वाले पुराने दरीबा बाजार के पास गली पीपल में। मुहल्ले का नाम है धर्मपुरा। इस मुहल्ले में एक छोटी सी दुकान दिखाई देती है जयतारा स्वीट्स। वैसे तो दुकान देखने में छोटी है पर है कई दशकों पुरानी। महज कुछ चीजें रोज यहां बनती हैं। पर इसके स्वाद के दीवाने देश के बाहर तक हैं। विदेशी सैलानियों पुरानी दिल्ली की गलियां दिखाने वाले टूरिस्ट गाइड जब यहां पहुंचते हैं तो इस मिठाई और नमकीन की दुकान के स्वाद के बारे में बताते हैं। ये दुकान एक जैन परिवार द्वारा संचालित है। इसलिए खान पान की शुद्धता में जैन परंपराओं का काफी ख्याल रखा जाता है। इस दुकान को 1944 में ताराचंद जैन (सोनीपत वाले) ने अपने पिता बद्री प्रसाद जैन के साथ आरंभ किया था।


इस दुकान से जुड़े तीसरी पीढ़ी के सख्श सतीश भारती बताते हैं कि जैन धर्म के अनुसार छने हुए जल का अपना महत्व होता है तो जयतारा स्वीट्स में केवल छने हुए जल का ही इस्तेमाल किया जाता है। आपको दुकान के नल पर हमेशा जल को छानने के लिए छन्नी लगी दिखाई देगी। व्यवहार में शुद्धता का निर्वाह करना बहुत मुश्किल  काम है। पर ऊंचे धार्मिक मूल्यों के कारण जयतारा स्वीट्स में इन नियमों का पालन सात दशकों से करता आ रहा है।

मटर समोसा और घेवर - जयतारा स्वीट्स का मटर समोसा फेनी और घेवर काफी लोकप्रिय है। मौसम के बदलते मिजाज और त्योहारों की रंगत को ध्यान में रखते हुए यहां पर खास किस्मों की मिठाइयां बनाई जाती हैं। यहां की मसालेदार खस्ता कचौड़ी और मटर के समोसे मशहूर हैं, जिनके साथ आलू की सब्जी की बजाय खास तौर पर बनी मेथी की चटनी परोसी जाती है। इसके अलावा यहां आप लजीज कचौड़ी और नमकीन का भी स्वाद ले सकते हैं।

आलू जिमीकंद नहीं - जैन सिद्धांतों के मुताबिक जमीन के अंदर उगने वाले खाद्य पदार्थ जैसे आलू, गाजर मूली आदि खाने को वर्जित बताया गया है। इसलिए यहां समोसे में आलू नहीं डाला जाता। वे खास तौर पर मटर समोसा बनाते हैं। साल के उन दिनों भी जब मटर महंगा होता है यहां मटर समोसा ही बनता है। त्योहारों के मौसम में यहां घेवर की मांग खूब बढ़ जाती है। जो एक बार जयतारा की मिठाई खा लेता है उनके स्वाद का मुरीद हो जाता है। यहां बनी मिठाइयों में चांदी के वर्क का इस्तेमाल नहीं किया जाता। 2015 में ताराचंद जैन नहीं रहे पर उनके द्वारा खोली गई ये दुकान अपने स्वाद का जादू बिखेर रही है।

कैसे पहुंचे – पता है - 2283 धर्मपुरा, दरीबा, चांदनी चौक। जयतारा स्वीट्स तक पहुंचने के लिए आप लालकिला से फतेहपुरी मसजिद की तरफ चलते समय बायीं तरफ स्थित दरीबा कला बाजार में पहुंचकर गली पीपल पूछिए। संकरी गलियों से होते हुए आप यहां पहुंच जाएंगे। (फोन -9811008716,9811025210)

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