Saturday, December 12, 2015

यदाद्रि के बाला जी – श्रीलक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी

आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद 2014 में तेलंगाना नया राज्य बना। पर देश का सबसे बड़ा और प्रसिद्ध तिरूपति बाला जी का मंदिर अब आंध्र प्रदेश में रह गया। तब तेलंगाना सरकार ने हैदराबाद से 62 किलोमीटर दूरी पर स्थित यदाद्रि के विष्णु मंदिर को भव्य रूप प्रदान करने का संकल्प लिया है। मंदिर का नाम श्री लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी वारी देवस्थानम है। मंदिर का पुराना नाम यादगिरी गट्टा था पर अब इसे छोटे नाम यदाद्रि के नाम से जाना जाता है। यहां विष्णु का मंदिर पहाड़ियों पर स्थित है। खास तौर पर रात में मंदिर क्षेत्र की खूबसूरती देखते ही बनती है। 

पंच नरसिम्हा क्षेत्रम-  कहा जाता है कि यदाद्रि में विष्णु पांच रुपों में अवतरित हुए हैं। ज्वाला नरसिम्हा, योगानंदा नरसिम्हा, गंधर्वनंदा नरसिम्हा, उग्र नरसिम्हा और लक्ष्मीनरसिम्हा उनके रूप हैं। इसलिए यदाद्रि को पंच नरसिम्हा क्षेत्रम भी कहा जाता है। इस मंदिर की कथा स्कंद पुराण में आती है। । कहा जाता है कि यादगिरी की पहाड़ियां कभी ऋषियों की तपस्थली रही है। आज भी यहां जिस तरह की शांति और सौंदर्य दिखाई देता है उसे देखकर लगता है कि ये स्थल तपस्वियों के लिए पसंदीदा रहा होगा। यदाद्रि मंदिर का गोपुरम विशाल है। मुख्य मंदिर गुफा में है। मंदिर में विष्णु का सुदर्शन चक्र सोने का बना है।  


रोग दुख होते हैं दूर - कहा जाता है कि कभी विष्णु ने यहां वैद्य नरसिम्हा का रूप लिया और तमाम श्रद्धालुओं को रोग दुख को दूर किया। आज भी आस्था है कि इनके दर्शन मात्र से रोग-दुख दूर होते हैं। यहां सारा उपचार फूल, फल और तुलसी तीर्थम से होता है। आज भी श्रद्धालु अपने रोग दूर करने के लिए मंडल ( 40 दिनों की प्रदक्षिणा) करते हैं। मंदिर की भव्यता 6 किलोमीटर दूर से ही दिखाई देती है। साल 2015 में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी में यदाद्रि मंदिर में दर्शन के लिए आए थे।

मंदिर में हर साल 11 दिनों का ब्रह्मोत्सवम मनाया जाता है जो मंदिर का मुख्य त्योहार है। रविवार और छुट्टियों के दिन मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है। तेलंगाना  के मुख्य मंत्री के चंद्रशेखर राव ने मंदिर को भव्य रूप प्रदान करने के लिए इसके बाहरी ले आउट में बड़ा बदलाव लाने की योजना बनाई है जिसे कार्यरूप दिया जा रहा है। यदाद्रि मंदिर से दो किलोमीटर की दूरी पर पुराना नरसिंहमा स्वामी मंदिर भी स्थित है।

दर्शन समय - मंदिर में पूजा सुबह 4 बजे से ही आरंभ हो जाती है। आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन सुबह 7.15 बजे से आरंभ होता है। दोपहर में 3 से 4 बजे तक मंदिर के द्वार बंद रहते हैं। शाम 4 से 5 बजे विशिष्ट दर्शन का समय है। दोपहर के बाद शाम 5 बजे से आम लोगों के लिए दर्शन आरंभ होता है। यहां आप रात्रि 9.45 बजे तक दर्शन कर सकते हैं। अतिशीघ्र दर्शन के लिए 100 रुपये का टिकट है जिसमें आपको दो लड्डू प्रसादम भी प्राप्त होता है।

कैसे पहुंचे - यदाद्रि मंदिर हैदराबाद से काजीपेट रेल मार्ग पर हैदराबाद से 62 किलोमीटर की दूरी है। यह नलगोंडा जिले में पड़ता है। आप हैदराबाद से लोकल ट्रेन से आकर रायगीर ( RAG) या भुवनगिरी (BG)  रेलवे स्टेशन उतर सकते हैं। रायगीर से मंदिर की दूरी 6 किलोमीटर है। रेलवे स्टेशन से स्थानीय वाहन उपलब्ध रहते हैं। सिकंदराबाद जंक्शन से 10.05 पर चलने वाली वारंगल मेमू 11.15 बजे रायगीर पहुंचती है। वैसे हैदराबाद से सीधे बस से भी यदाद्रि मंदिर पहुंचा जा सकता है। अगर आप वारंगल काजीपेट की तरफ से जा रहे हैं तो मंदिर पहुंचने के लिए भुवनगिरी या रायगीर रेलवे स्टेशन पर उतरें।


1 comment:

  1. यदाद्रि के बालाजी- श्रीलक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी के बारे में बहुत अच्छी जानकारी प्रस्तुति हेतु आभार!

    ReplyDelete