Wednesday, November 25, 2015

इतना बड़ा माखन कान्हा ने खाया

मैया मोरी मैंने ही माखन खायो। बार बार जसोदा के पूछने पर आखिर कान्हा को मानना ही पड़ा था कि माखन उन्होंने ही खाया। लेकिन आखिर कान्हा का माखन कितना बड़ा था। इसका जवाब मिलता है महाबलीपुरम में आकर। महाबलीपुरम के बस स्टैंड के पीछे की तरफ पहाड़ियों पर एक गोल सा पत्थर दिखाई देता है। 

ये पत्थर पहाड पर कैसे टिका हुआ है उसे देखकर कर अचरज होता है। दूर से देखकर लगता है कि यह कभी भी लुढक जाएगा। पर यह अपनी जगह पर मदबूती से टिका हुआ है। इसे नाम दिया गया है कृष्णा बटर बॉल। यानी कान्हा का माखन। इसे देख मेरे बेटे अनादि पूछ बैठते हैं क्या कान्हा जी इतना बड़ा माखन खाते थे। कहा जाता है कि राजा के कई हाथी मिलकर भी इस बटर बॉल को अपनी जगह से एक इंच भी इधर से उधर नहीं कर सके।

अर्जुन तप स्थली –  महाबलीपुरम के बस स्टैंड के ठीक पीछे की गुफाओं को अर्जुन तप के नाम से जाना जाता है। यहां पर चट्टानों से बनी अर्जुन की तपस्या करती हुई मूर्ति है। यहां पर पत्थरों पर उकेरी गई नक्काशी के जरिए भगवान शिव से जुड़ी गंगा के अवतरण की घटना को भी दर्शया गया है।  लेकिन इन सब के बीच सबसे सुंदर है गाय का दूध निकालती हुई मूर्ति। 


इन मूर्तियों को आप घंटों निहारते रह सकते हैं लेकिन आपका मन नहीं भरता। यहां कुल 100 से ज्यादा मूर्तियां गुफाओं को तराश कर बनी हैं। मूर्तियों की ज्यादातर कथाएं महाभारत काल की हैं। राजा भागीरथ के गंगा अवतरण का दृश्य भी यहां पत्थरों पर उकेरा गया है।


पंचरथ – महाबलीपुरम आने वाले सैलानी पंच रथ को जरूर देखने जाते हैं। यह बस स्टैंड से एक किलोमीटर की दूरी पर है। ये रथ पहाड़ी की चट्टानों को काट कर बनाया गए हैं। शिल्पियों ने चट्टान को भीतर और बाहर से काट कर पहाड़ से अलग कर दिया है. ये प्रसिद्ध रथ शहर के दक्षिणी सिरे पर है। पंच पांडवों के नाम पर इन रथों को पांडव रथ कहा जाता है। इन पांच रथों में से चार रथों को एकल चट्टान पर उकेरा गया है, जबकि द्रौपदी और अर्जुन रथ चौकोर है। इन सबके बीच धर्मराज युधिष्ठिर का रथ सबसे ऊंचा है।

महिषासुर मर्दिनी गुफाएं – अर्जुन तप से एक किलोमीटर की दूरी पर पंच रथ स्थित है। लेकिन इसके रास्ते में महिषासुर मर्दिनी गुफाएं पड़ती हैं। इन गुफाओं में दुर्गा की महिषासुर को वध करते हुए प्रतिमा बनी है। इसके अलावा यहां गुफाओं में कई और प्रतिमाएं हैं। इन गुफाओं की ओर जाते हुए हुए आप गर्मी में छाछ पीने और फल खाने का आनंद ले सकते हैं।

सी सेल म्युजियम - आजकल पंच रथ के पास ही सी सेल म्जुयिम बन गया है। लोग इसे भी देखने जाते हैं। इसका टिकट 100 रुपये प्रति व्यक्ति है। यहां जलीय जीवन की अच्छी जानकारी मिलती है। यह एक निजी संग्रहालय है, पर देखने योग्य है। यहां आप मोतियों के विकास की वैज्ञानिक कहानी जान सकते हैं। यहां सबसे छोटा और सबसे बड़ा सेल देखा जा सकता है।
महाबलीपुरम - महिषासुर मर्दिनी गुफाओं की कलाकृतियां। 
महाबलीपुरम - महिषासुर मर्दिनी गुफाओं की कलाकृतियां। 




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