Thursday, November 26, 2015

महाबलीपुरम का लाइट हाउस

बस स्टैंड से पंच रथ के रास्ते में महाबलीपुरम का लाइट हाउस भी पड़ता है। आप इस पर चढाई भी कर सकते हैं। इस 42 मीटर ऊंचे लाइट हाउस के लिए प्रवेश टिकट है। लाइट हाउस समुद्र में चलने वाले नाव और जहाज को रास्ता दिखाने के मकसद से बनाया जाता है। साल 2011 में इस सैलानियों के लिए खोला गया। 

साल 2001 में इसे लिट्टे की धमकी के बाद बंद कर दिया गया था। इसका निर्माण 1887 में हुआ था, 1904 से यह लोगों को रास्ता दिखा रहा है। इसके बगल में ही 640 ई. में पल्लव राजा महेंद्र वर्मन द्वारा बनवाया गया लाइट हाउस देखा जा सकता है। सातवीं सदी में महाबलीपुरम व्यापार का बड़ा केंद्र और अति व्यस्त बंदरगाह हुआ करता था। तब इस लाइट हाउस की काफी अहमियत थी।

लाइट हाउस के उपर से पूरे महाबलीपुरम शहर का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। हालांकि आप यहां ज्यादा देर तक नहीं रूक सकते। लाइट हाउस पर चढाई के लिए 10 रुपये का टिकट लेना पड़ता है।

मुकुंद नयनार मंदिर-  हमें महाबलीपुरम के बाईपास पर मुकुंद नयनार मंदिर नजर आता है। यह भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से संरक्षित स्मारक की श्रेणी में आने वाला मंदिर है। मंदिर पंचरथ मंदिर के धर्मराज रथ की तरह देखने में नजर आता है। लंबे समय तक यह मंदिर 12 फीट नीचे दबा हुआ था। यह पल्लव राजा राजसिम्हा के समय का माना जाता है। हालांकि मुकुंद नयनार मंदिर को देखने कम ही सैलानी पहुंचते हैं।

तमिल भक्ति आंदोलन में 63 नयनारों की संकल्पना है। ये नयनार शिव के भक्त हुआ करते थे। नयनारों का उद्भव मध्यकाल में मुख्यतः दक्षिण भारत के तमिलनाडु में ही माना जाता है। कुल 63 नयनारों ने शैव सिद्धान्तो के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसी प्रकार विष्णु के भक्त सन्तों को आलवार कहते हैं। सभी नायनारों की गिनती मुक्तात्मा में होती है। इनकी मूर्तियां मंदिरों मे स्थापित की गई है और इनकी पूजा भगवान के समान ही की जाती है। हमने इससे पहले चेन्नई के कपालेश्वर मंदिर में 63 नयनारों की प्रतिमा देखी थी।

टाइगर गुफाएं – यह महाबलीपुरम से 5 किलोमीटर दूर चेन्नई मार्ग पर स्थित है। पत्थरों को काटकर यहां बाघ की मुखाकृति बनाई गई है। इसका निर्माण भी आठवीं सदी में पल्लव राजाओं के काल में हुआ है। यहां पर एक विशाल मुक्ताकाश मंच (ओपन एयर थियेटर) बना हुआ है। यहां पर पल्लवकाल में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। यहां जाने के लिए अलग से वाहन का इंतजाम आपको करना पडेगा।


समुद्र तटीय मंदिर देखने के बाद अनादि और माधवी थक गए थे वे चाहते थे आगे की स्थलों को देखने के लिए हम आटो रिक्शा बुक करें। पर मैं चाहता था कि हम पैदल ही सारे स्थलों का भ्रमण करें। बात आईसक्रीम और नारियल पानी के साथ बनी। दिन चढ़ने के साथ थोड़ी गर्मी बढ़ती जा रही थी। पर जब हम पैदल चलते हैं आसपास के स्थलों पर निगाह डालना बेहतर तरीके से होता है। इस दौरान हम कई ऐसी चीजें भी देख पाते हैं जो वाहन से चलते समय संभव नहीं है।  हर साल दिसंबर में तमिलनाडु टूरिज्म महाबलीपुरम डांस फेस्टिवल का आयोजन करता है। इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकार प्रस्तुति देते हैं। बड़ी संख्या में तब सैलानी यहां पहुंचते हैं। इसके साथ ही वे नया साल भी यहीं मनाते हैं।



 





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