Monday, October 19, 2015

बलखाती बेतवा और रमणीक राजामहल

सुंदर किलों और मंदिरों के शहर ओरछा का इतिहास मध्यकालीन भारत से जुड़ा हुआ है। ओरछा  शहर की नींव बुंदेला राजपूत सरदार रुद्र प्रताप ने डाली थी। 16वीं सदी में राजा रूद्र प्रताप द्वारा ओरछा शहर को बसाया गया था। उन्होंने इस जगह को अपनी राजधानी बनाई और यहां शासन किया। इससे पहले बुंदेल राजाओं की राजधानी कुडार में हुआ करती थी। ओरछा किले के प्राचीर से पास में बहती बलखाती बेतवा नदी को देखकर दिल खुश हो जाता है।

ओरछा के महलों में राजपूत और मुगल वास्तुकला का सुमेल देखने को मिलता है। इसका परफेक्शन इतना अधिक है कि यहां आने वाले सैलानी आश्चर्यचकित रह जाते हैं। ओरछा के स्मारकों  की  छतरियां और जालियां पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। शहर से बाहर चंद्रशेखर आजाद का स्मारक भी है, जिसे शहीद स्मारक के नाम से जाना जाता है।

तो चलते हैं पहले राजमहल। शहर के मुख्य चौक से बायीं तरफ पैदल चलकर राजमहल पहुंचा जा सकता है। महल के बगल में नहर पर पुल को पार करने के बाद प्रवेश द्वार पर आप पहुंच जाते हैं। राज महल के अंदर राजा महल, जहांगीर महल, दाउजी की कोठी, राय प्रवीणा महल, और ऊंट खाना स्थित हैं। राजा महल का निर्माण 1531 में राजा रुद्र प्रताप के कार्यकाल में आरंभ हुआ। उनके पुत्र भारती चंद्र के समय भी निर्माण कार्य चलता रहा। बाद में उनके उत्तराधिकारी मधुकर शाह के शासन काल में इसमें कई बदलाव किए गए तब जाकर ये महल पूरा हो सका।

मुगल बादशाहों से प्रेरित होकर बुंदेल राजा मधुकर शाह ने दीवानेआम बनवाया था। राजा का महल तीन स्तरों में बना है। इसमें आम जनता के बैठने की जगह, उसके ऊपर दरबारियों के लिए और सबसे ऊपर राजा के लिए स्थान बना हुआ है। राजा के निजी आवास से निकल कर दीवाने आम तक आने के लिए सीधा रास्ता बना हुआ था।

राजमहल के छतों पर बुंदेली शैली की सजीव चित्रकारी देख सकते हैं। इसमें हाथी, तोते, मोर, बारहसिंगे, भैंस, हिरण आदि के चित्र बने हुए हैं। कई चित्रों  संगीत समारोह, राजा के शिकार के दृश्य भी अंकित किए गए हैं। इन चित्रों के संरक्षण के लिए इनका फोटो लेते समय फ्लैश का प्रयोग वर्जित है, ठीक उसी तरह जैसे अजंता की गुफाओ में निर्देश दिए गए हैं।


राजामहल में बना है विशाल शौचालय – 

आमतौर पर आप देश के तमाम किले घूमते होंगे तो वहां कहीं आपको शौचालय नहीं नजर आता होगा। पर यहां राजा महल में शानदार शौचालय का निर्माण काय गया है। यहां आजकल के जमाने की तरह बैठने की शीट्स बनी हुई हैं। 

नीचे से शौच के बहकर आगे जाने और उसकी सफाई का इंतजाम है। शौचालय खंड में एक नहीं कई शौचालय बनाए गए हैं जो राजा और रानियों के इस्तेमाल के लिए बने हैं। आमतौर पर मुगल राजाओं के किले में कई कहीं शौचालय नहीं बनाए गए मिलते हैं। तो फिर आखिर राजा लोग तब कौन सा तरीका अपनाते थे। हमें एक मजेदार बात पता चली। ओरछा में एक गाइड बताते हैं कि मुगल राजा शौचालय में नहीं बल्कि अस्पतालों में जिस तरह के टायलेट पॉट इस्तेमाल किए जाते हैं वैसे पॉट में निपटान किया करते थे।


लाइट एंड साउंड शो – ओरछा के महलों का इतिहास बताने के लिए हर रोज शाम को महल के प्रांगण में लाइट एंड साउंड शो का आयोजन होता है। अगर आप शाम को ओरछा में है तो इस शो को जरूर देखें।

एक घंटे का ये शो शाम को साढ़े सात बजे शुरू होता है। साढ़े सात बजे का शो अंगरेजी में होता है। रात 8.45 से 9.45 का शो हिंदी में होता है। शो का टिकट 100 रुपये का है। बच्चों के लिए 50 रुपये का है।  


हर रोज खुला - ओरछा के महल सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुले रहते हैं। सातो दिन यहां घूमा जा सकता है। बंद होने का कोई भी दिन नहीं है। देशी नागरिकों के लिए प्रवेश शुल्क 10 रुपये है। कैमरे के लिए 25 रुपये का अलग से टिकट लेना पड़ता है। 
- vidyutp@gmail.com
राजामहल से चतुर्भुज मंदिर और राजारा राममंदिर का नजारा।

( ORCHA, MP, FOREST, FORT, BETWA RIVER, RAJA MAHAL  ) 

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