Monday, October 5, 2015

इंडोनेशिया में गांधीवाद की अलख जगाते इंद्र

इंडोनेशिया के इंद्र उदयना। 47 साल की उम्र। युवा जोश। इंद्र इंडोनिशया में पिछले कई सालों से गांधीवाद का अलख जगा रहे हैं। उनके कार्यों को सम्मान देते हुए साल 2011 में उन्हें अंतरराष्ट्रीय श्रेणी में विदेशों में गांधीवादी मूल्यों के प्रचार प्रसार के लिए जमनालाल बजाज पुरस्कार प्रदान किया गया। इंद्र से हमारी मुलाकात जौरा के महात्मा गांधी सेवा आश्रम में होती है। वे 45 दिन के हिंदुस्तान दौरे पर आए हैं।

हमारे साथ शिविर की गतिविधियों में हिस्सा लेते हुए इंद्र कभी खुद को विशिष्ट बताने की कोशिश नहीं करते। आम शिविरार्थियों की पंक्ति में लगकर भोजन लेना। जब कोई पूछता है तो वे बड़ी ही आत्मीयता से अपने बारे में बताते हैं। देश भर से आए युवाओं के बीच वे ऐसे घुलमिल जाते हैं कि पता ही नहीं चलता है कि भारत से बाहर के हैं। इंडोनेशिया एक ऐसा देश है जहां दुनिया की सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी रहती है। वहां पर हिंदुओं की संख्या 15 लाख के आसपास है। पर बहुत छोटी उम्र में वे गांधी जी के विचारों से आकर्षित हुए उसके बाद सारा जीवन गांधी विचारों के साथ चलने को तय कर लिया। बाली में उन्होंने गांधी का आश्रम बनाया है।इस आश्रम की स्थापना जनवरी 2001 में हुई। उनका आश्रम गांधी पुरी इंडोनेशिया में गांधीवादी मूल्यों के प्रचार प्रसार में लगा हुआ है। अहिंसा, मानवतावाद के प्रचार के लिए उन्होंने गांधीवादी साहित्य का इंडोनेशियाई भाषा में अनुवाद पेश किया। इंद्र सालों भर हिन्दुस्तान के गांधीवादी संस्थाओं और गांधीवादी विचारों के साथ काम करने वाले लोगों के साथ लगातार संपर्क में रहते हैं।


27 सितंबर की शाम को जौरा आश्रम से शाम को निकल कर हमलोग नवोदय विद्यालय मानपुर पहुंचे। यहां स्कूल के 575 छात्र छात्राओं के बीच सर्वधर्म प्रार्थना का आयोजन होना था। इंद्र बच्चों के बीच जाकर बच्चे की तरह बन गए। उन्होंने यहां पर एक गीत इंडोनेशियाई भाषा में गाया जिसे बच्चे गुनगुनाने लगे। लगातार भारत आते हुए इंद्र अब थोडी थोड़ी हिंदी भी बोल और समझ लेते हैं। वास्तव में इंद्र अब इंडोनिशयाई और भारत के बीच सभ्यता संस्कृति के आदान प्रदान के सेतु बन चुके हैं। इंद्र के साथ संवाद करते हुए मुझे इंडोनेशिया में होने वाली रामायण बैले की याद आई। वहां के मुस्लिम भी राम को अपना वंशज मानते हुए रामायण बैले करते हैं। 1995 में दिल्ली के सीरी फोर्ट आडिटोरियम में मुझे रामायण बैले की शानदार प्रस्तुति देखने का मौका मिला था।
http://www.ashramgandhipuri.com/

About Indra Udayana
Agus Indra Udayana since a decade has been actively engaged in promoting Gandhian values in Indonesia through his four Ashrams in Bali and Lombok based on the principles of non-violence, truth and humanitarianism. He is disseminating Gandhian ideologies particularly those relevant to the prevailing social concerns and has translated Gandhian writings into Indonesian language. Prompted by a serious concern for the spiritual, cultural, social and economic life in Bali, the Ashram Gandhi Puri was instituted to promote enduring interfaith and dialogue to create cultures of peace, justice and healing.
Under the leadership of Indra, the Ashrams facilitate accommodation and overall developmental support to the economically marginalized students. The local people have benefited tremendously from the services and teachings of the Ashram in the areas of brotherhood, self reliance, environment, peace, etc. Indra proactively works towards promoting Indian art and culture in Indonesia and has sought support of the Indian Council for Cultural Relations to promote Balinese culture in India. Indra maintains close contacts with the prominent Gandhian institutes and scholars in India. He regularly participates in social work activities in India, Indonesia and other parts of the world working in close co-ordination with the NGOs promoting Gandhian values.

 
Indra Udayana, S N Subbarao and Principal JNV Joura, MORNEA. 

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