Wednesday, September 9, 2015

जय मां कैला देवी – जहां डाकू भी आते हैं मां से मन्नत मांगने

राजस्थान के करौली जिले में शक्ति की देवी कैला देवी का मंदिर सुंदर है। इस मंदिर के प्रति राजस्थान, मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश केलोगों में अगाध आस्था है। यहां तक की चंबल के क्षेत्र में सक्रिय डाकू भी इस मंदिर में मां की आराधना करने आया करते थे।

कैला देवी को  जादौन राजपूत लोग अपनी कुल देवी मानते हैं। कैला देवी का मंदिर ये कैला देवी गांव में कालीसिल नदी के तट पर बना है। त्रिकूट की मनोरम पहाड़ियों की तलहटी में स्थित इस मंदिर का निर्माण राजा भोमपाल ने 1600 ई. में करवाया था। मुख्य मन्दिर संगमरमर से बना हुआ है  मंदिर पूरब मुख का है।  कैला देवी मंदिर में चांदी की चौकी और सोने की छतरियों के नीचे दो प्रतिमाएं हैं। इनमें एक बाईं ओर उसका मुंह कुछ टेढ़ा है, वही कैला देवी हैं।

मान्यतानुसार कैला देवी मां द्वापर युग में कंस की कारागार में उत्पन्न हुई कन्या है, जो राक्षसों से पीडि़त समाज की रक्षा के लिए एक तपस्वी द्वारा यहां बुलाई गई थीं।  एक कथा के अनुसार करौली के राज्य पर एक दानव बहुत अत्याचार करता था। वहां के राजा दो भाई थे। दोनों भाई दानव से परेशान थे। तो दोनों भाईयो ने माँ कैला देवी की पूजा की ओर करोली में आकर दानव से मुत्ति के लिए प्रार्थना की। मां कैला देवी बाड़ी  से करोली पर आई और दानव का संहार किया। जिसका प्रमाण कलिशील नदी के किनारे मां और दानव के पैरो के चिन्ह आज भी देखे जा सकते हैं।

लंबी पदयात्रा करके दर्शन - राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिलों के लोग लंबी पदयात्रा करके कैला देवी का दर्शन करने के लिए चैत महीने में आते हैं। लोग कैला देवी से संतान, लंबी उम्र की दुआ मांगते हैं। कहते हैं मां सबकी सुनती हैं। चैत्र और आश्विन नवरात्रि के इन दोनों अवसरों पर इस क्षेत्र से लाखों श्रद्धालु कैला देवी के करौली स्थित मंदिर के दर्शन करने पहुंचते हैं। इस मौके पर विशाल मेला लगता है। मेले के समय आसपास के शहरों से कैला देवी के लिए 24 घंटे बसें चलती हैं।

डकैत भी आते हैं दर्शन करने - मां कैला देवी के इस मंदिर में डकैत वेश बदलकर आते हैं और मां कैला देवी की साधना करते हैं। लक्ष्य की साधना के लिए मां से मन्नत मांगते हैं। मजे की बात इसकी जानकारी जासूसों के माध्यम से पुलिस को मिल जाती है। पर पुलिस लाख कोशिश कर मंदिर परिसर में उन्हें पकड़ नहीं पाती।

कहां ठहरें - कैला देवी मंदिर से पहले आधा किलोमीटर लंबा बाजार है। इसमें दोनों तरफ प्रसाद की दुकानें और भोजनालय है। कैला देवी में रात्रि विश्राम के लिए अतिथि गृह और धर्मशालाएं भी मौजूद हैं। एक विशाल धर्मशाला करौली के राजघराने द्वारा निर्मित है। मंदिर परिसर में भी एक भोजनालय है जहां रियायती दरों पर भोजन और नास्ता उपलब्ध रहता है।


कैसे पहुंचे – रेल मार्ग से जाने पर हिंडौन सिटी या फिर गंगापुर सिटी रेलवे स्टेशन उतर कर कैला देवी बस से जा सकते हैं। आप हिंडौन सिटी से बस से करौली पहुंचे। ( 33 किलोमीटर) करौली शहर से कैला देवी की दूरी 23 किलोमीटर है। हर आधे घंटे पर बसें और जीप मिलती हैं। सवाई माधोपुर जिले के रेलवे स्टेशन गंगापुर सिटी से भी अपने वाहन से कैला देवी पहुंच सकते हैं। गंगापुर सिटी से कैला देवी की दूरी 34 किलोमीटर है।वैसे बेहतर होगा कि आप जिला मुख्यालय करौली में रूकें और यहां से कैला देवी के दर्शन करने जाएं। करौली बस स्टैंड के पास रहने के लिए रियायती और बेहतर जगह है जगदंबा लॉज। अगर थोड़ा बेहतर और महंगी जगह में ठहरना हो तो होटल करौली अजय विकल्प हो सकता है। करौली अजय के साथ भोजनालय भी है।
-         जगदंबा लॉज, गुलाबबाग मार्ट, करौली (राज)- 322241 फोन  (07464) 220577- 07464220577

- vidyutp@gmail.com

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