Sunday, September 20, 2015

भरतपुर का लोहगढ़ किला जिसे कोई भेद नहीं पाया

भरतपुर जिले में स्थित लोहागढ़ किला आयरन फोर्ट के नाम से भी लोकप्रिय है और इसका निर्माण 18वीं सदी में हुआ था।  भरतपुर में लौहगढ़ का किला भारत में एकमात्र ऐसा गढ़ है जिसे कभी कोई दूसरा कब्जा नहीं कर पाया।
भरतपुर के राजाओं ने मातृभूमि की सेवा के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया। राजस्थान प्रदेश की ऐसी ही एक रियासत थी भरतपुर। किला भरतपुर के जाट शासकों की हिम्मत और शौर्य का प्रतीक है. मिट्टी के इस किले की यह एक विशेषता रही है कि उसे आजतक कोई भी हरा नहीं सका है। इसलिए यह किला आज भी अजेय दुर्ग लोहागढ़ के नाम से विख्यात है। भरतपुर का पुराना नाम भी लोहागढ़ रहा है। 
महाराजा सूरजमल ने एक अभेध्य किले की परिकल्पना की थी, जिसके अन्तर्गत शर्त यह थी कि पैसा भी कम लगे और मजबूती मे बेमिशाल हो। अपने क्षेत्र की सुरक्षा के लिए ऐसे किले का निर्माण करते थे जिसे दुश्मन के तोप के गोले भी न भेद पाए। इस किले को कभी कोई नहीं जीत पाया यहां तक की अंग्रेज भी नहीं जिन्होंने इस किले पर 13 बार अपनी तोपों के साथ हमला किया पर हर बार नाकामी हाथ लगी। 1805 ई. में जनवरी से अप्रैल तक लॉर्ड लेक ने भरतपुर के किले का घेरा डाला था। मिट्टी से बने इस किले की दीवारों को अंगरेजों की तोपें भेद नहीं पाईं।

भरतपुर का किला बांसी और पहाड़पुर के गुलाबी पत्थरों से बना है। इसका काव्यमय वर्णन सूरजमल के राजकवि सोमनाथ द्वारा रचित सुजान-विलास में मिलता है। बांसी पहाड़पुर से संगमरमर और बरेठा से लाल पत्थरभरतपुर, कुम्हेर और वैर तक पहुचाया जाना तब बड़ा दुष्कर कार्य था। के नटवर सिंह अपनी पुस्तक – महाराजा सूरजमल में लिखते हैं-  डीग से बीस मील दक्षिण-पश्चिम में स्थित सोघर के जंगल काट दिए गए और दलदतें पाट ही गई और वहाँ विशाल एवं भव्य  भरतपुर का किला बना । एक ओर से भरतपुर दलदली जमीन से घिरा था तो दो तरफ से वाणगंगा और रुपारेल नदियां इसकी रक्षा करती थीं। इस किले को बनाने का काम 1732 में आरंभ हुआ। जो कई राजाओं के कार्यकाल तक चलता रहा।
अनाह गेट भरतपुर। 
 मुख्य किले के चारों तरफ विशाल खाई बनवाई गई। इसमें पानी लाने का इंतजाम किया गया। ये खाई 40 फीट गहरी और 175 फीट चौड़ी है। किले में प्रवेश के लिए दो पुल बनाए गए थे। पूर्वी द्वार को अष्टधातु द्वार कहते थे। मुख्य किले की दीवारें 100 फीट ऊंची और 30 फीच चौड़ी थी। किले में सुरक्षा के लिए कुल 8 बुर्ज बनाए गए थे। सबसे ऊंचे बुर्ज से फतेहपुर सीकरी तक दिखाई देता था।

भरतपुर शहर के दस दरवाजे

भरतपुर शहर के बाहरी इलाके में भी सुरक्षा के लिए एक बाहरी खाई बनवाई गई जो 250 फीट चौड़ी और 20 फीट गहरी है। खाई बनाने से जो मलबा निकला उससे मोटी मिट्टी की दीवार बनाई गई। किले में कुल 10 बड़े दरवाजे थे। मथुरा पोल, वीर नारायण पोल, अटलबंद पोल, नीम पोल, अनाह पोल, कुम्हेर पोल, चांद पोल, गोवर्धन पोल, जघीना पोल, सूरज पोल जैसे नाम थे दरवाजों के। अब मिट्टी की दीवारें नजर नहीं आतीं पर शहर के दरवाजे आज भी दिखाई देतें हैं। 

vidyutp@gmail.com

( BHARATPUR FORT, LOHAGARH, 10 GATES , ANAH GATE  ) 

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