Friday, September 11, 2015

करौली का अदभुत मदन मोहन मंदिर

कान्हा जी यानी मदन मोहनजी का मंदिर करौली किले में मुख्य शहर में स्थित है। इस मंदिर का निर्माण महाराजा गोपाल सिंह ने करवाया था। इस मंदिर में भगवान कृष्ण और देवी राधा की प्रतिमाएं हैं। करौली के निवासियों में मदन मोहन के प्रति अपार श्रद्धा और आस्था है। श्रीकृष्ण  भगवान के अनेक नामों में से एक प्रिय नाम मदन मोहन भी है।

करौली के राजा गोपाल सिंह ने 1725 ये मंदिर बनवाया गया। कहा जाता है कि दौलताबाद पर विजय के बाद महाराजा गोपाल सिंह जी को सपना आया जिसमें उन्हें मदनमोहन जी ने कहा कि मुझे करौली ले चलो। तब मदनमोहन की प्रतिमा को जयपुर के आमेर से करौली ले जाकर स्थापित किया गया। इस मंदिर के निर्माण मे दो से तीन साल का समय लगा था।



मदन मोहन मंदिर में स्थापित कृष्ण जी की ऊंचाई तीन फीट है जबकि राधा जी दो फीट की हैं। दोनों मूर्तियां अष्टधातु की बनी हैं। दोंनो मूर्तियों की सुंदरता अदभुत है।
मंदिर मध्यकालीन वास्तुकला का सुंदर नमूना है। मंदिर के प्रवेश द्वार से गर्भ गृह के बीच लंबा चौबारा है। गर्भ गृह में सुंदर नक्कासियां भी हैं। मंदिर के निर्माण में करौली के पत्थर का इस्तेमाल किया गया है। मुख्य मंदिर के अलावा मंदिर परिसर में कई और मूर्तियां स्थापित की गई हैं। चांदनी रात में मंदिर का सौंदर्य और बढ़ जाता है।

महाराजा गोपाल सिंह ने जिस गुसाईं को सबसे पहले मंदिर का प्रभार सौंपा था, वह मुर्शिदाबाद के रामकिशोर थे। इसके बाद मदनकिशोर यहां गुसाईं रहे। करौली के मंदिर को राजघराने की ओर से अचल संपत्ति प्रदान की गई थी जिससे  18वीं सदी में 27 हजार  रुपये की सालाना आय होती थी।

दिन में सात बार भोग - भगवान मदन मोहन को दिन में सात बार भोग लगाया जाता है। उन्हें मिष्टान्न काफी प्रिय है। उनके भोग में मुख्य है दोपहर को राजभोग और रात को शयनभोग। शेष पांच भोगों में से मिष्ठान आदि रहता है। इसमें मालपुआ, रसगुल्ले जैसी मिठाइयां होती हैं। खास मौकों पर मदन मोहन जी को 56 भोग लगाया जाता है। इसमे नाना प्रकार के पकवान होते हैं। इसके लिए बड़ी तैयारी की जाती है।

मदनमोहन जी के सेवाकाल में सुबह पांच बजे मंगल आरती  होती है। इसके बाद सुबह नौ  बजे धूप, 11 बजे शृंगार, तीन बजे दुबारा धूप और शाम को सात बजे सांध्य आरती होती है। मंदिर सुबह 5 बजे खुलता है और रात्रि 10 बजे बंद हो जाता है। दोपहर में भी दो घंटे के लिए भी मंदिर बंद होता है। गोपाष्टमी , श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और राधाअष्टमी मंदिर के प्रमुख त्योहार हैं। मंदिर के पूजा में समय के अनुशासन का पूरा पालन होता है। 
ताज खां की भक्ति - कहा जाता है कि ताज खां नाम का एक मुसलमान मदन मोहन मंदिर के कृष्ण की प्रतिमा की एक झलक पाते ही उनका अनन्य भक्त बन बैठा। ताज खां यहां की कचहरी में एक चपरासी था। भक्त ताज खां को आज भी करौली के मदनमोहन मंदिर में संध्या आरती के समय 'ताज भक्त मुसलिम पै प्रभु तुम दया करी। भोजन लै घर पहुंचे दीनदयाल हरी।।' इस दोहे के साथ याद किया जाता है।

कैसे पहुंचे – करौली बस स्टैंड से मंदिर की दूरी दो किलोमीटर है। करौली के मुख्य बस स्टैंड से रिक्शा या आटो से या फिर पैदल चलते हुए भी मंदिर तक जा सकते हैं। मंदिर करौली किले के पीछे चौधरीपाडा में स्थित है। मंदिर के साथ श्रद्धालुओं के लिए एक धर्मशाला भी है।
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(MADAN MOHAN MANDIR, KARAULI, RAJSTHAN ) 

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