Saturday, September 19, 2015

भरतपुर का संग्रहालय – 56 खंभे लाल दीवारें

भरतपुर किले के अंदर भरतपुर स्टेट म्यूजियम स्थित है जिसको देखे बिना आपकी भरतपुर यात्रा अधूरी है। आटो रिक्शा वाला मुझे भरतपुर किले के मुख्य द्वार पर छोड़ देता है। पुल पारकर अष्टधातु गेट से  मैं अंदर प्रवेश करता हूं। कई घोड़ा गाड़ी दिखाई देते हैं। यानी भरतपुर शहर में अभी भी घोड़ा गाड़ी चलते हैं। मैं देखता हूं कि किले के मुख्य द्वार के अंदर भी आबादी बसी है। दुकाने हैं लोगों के घर हैं। थोड़ी दूर आगे चलने पर टाउन हाल आता है। यहां से बाईं तरफ चलने पर स्टेट म्यूजियम का पता पा लेता हूं। गरमी है इसलिए रूक कर जूस पीता हूं। संग्राहलय के प्रवेशद्वार पर टिकट घर है। प्रवेश टिकट 10 रुपये का है।

लोहागढ़ किले के अंदर स्थित भरतपुर संग्रहालय में अद्वितीय और पुरातन कलाकृतियाँ और पुरातात्विक संसाधन हैं। यहां आने वाले सैलानी इसके पुरातन सौंदर्य को देख कर चकाचैंध हो जाते हैं। यहां खास तौर पर अस्त्र शस्त्र और मूर्तियों का विशाल संग्रह है।

पहले राजा की कचहरी था - इस तीन मंजिला इमारत का निर्माण महाराजा बलवंत सिंह ने 19 वीं शताब्दी के दौरान किया था। यह संग्रहालय पहले भरतपुर के शासकों का प्रशासनिक कार्यालय था और इसे कचहरी कलां के नाम से जाना जाता था। भरतपुर के शासकों का प्रशासनिक खंड हुआ करता था। बाद में  1 नवंबर 1944 में इसे संग्रहालय का रुप दिया गया।  यह संग्रहालय भरतपुर की ऐतिहासिक संपत्ति के शानदार संचयन का प्रदर्शन करता है। यहां रियासतकालीन 500 से अधिक कलाकृतियां हैं।
भरतपुर के राजाओं का कमरा, खास या व्यक्तिगत ब्लॉक संग्रहालय का बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। 

इस संग्रहालय को देखकर दर्शक भरतपुर के राजाओं के वैभव और भव्यता का अंदाज लगा सकते हैं। यहां की कलाकृतियां और स्मृति चिन्ह भरतपुर के स्थानीय निकाय ने बहुत ही सावधानी से सहेजे हैं। भरतपुर राजकीय संग्रहालय में बेहद बेशकीमती मूर्तियां भी रखी हैं। ये कीमती सामान मैलाह, नोह, बयाना और बारेह नाम के पुराने गांवों की पुरातात्विक खुदाई के दौरान मिले थे। यह संग्रहालय प्राचीन मूर्तियों, चित्रों, सिक्कों, शिलालेखों, सिक्कों, प्राणी नमूनों, सजावटी कला वस्तुओं और जाट शासकों द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले हथियारों का दुर्लभ संचयन प्रस्तुत करता है। इस संग्रहालय की आर्ट गैलरी में लिथो पेपर, अबरख और पीपल के पत्तों पर बने लघु चित्र दिखाए गए हैं।
इसमें बनता था पूरे गांव का भोजन। 

अदभुत् स्नानागार (हमाम)  मुख्य द्वार से दाहिनी तरफ जाने पर इस भवन में महाराजा का बनवाया हुआ स्नानागार है। इस तरह का विशाल स्नानागार देश में आपको शायद ही कहीं और देखने को मिले। इस स्नानागार में कई हाल बने हुए हैं। इनमें प्राकृतिक तौर पर रोशनी आने का इंतजाम है। इनमें पानी लाने के लिए पाइप से अंडरग्राउंड इंतजाम किया गया था। स्नानागर के अंदर कुछ हाल ऐसे हैं जिसमें पानी गरम करने का भी इंतजाम किया गया था। हौद के नीचे भट्टियां लगाई गई थीं जिससे पानी गरम हो जाता है। स्नानागार की दीवारों पर शानदार नक्कासी की गई है। कपड़े बदलने के लिए भी कमरे बनाए गए हैं। इन्हें देखकर राजा रानियों के शाही अंदाज और शौक का एहासास होता है।
संग्रहालय की पहली मंजिल पर बने हाल में कई तरह के अस्त्र शस्त्र का संग्रह देखा जा सकता है। इसमें बहुत ही छोटे का आकार की पिस्तौल भी देखी जा सकती है तो बड़े हथियार भी देखे जा सकते हैं। घड़ियां, राजाओ द्वारा इस्तेमाल की गई कटलरी का विशाल संग्रह भी यहां है। संग्रहालय के द्वार के पास एक विशाल कड़ाही रखी गई है जिसमें एक साथ कई हजार लोगों के भोजन तैयार किया जाता था। गरमी से बचने के लिए विशाल चंवर देखा जा सकता है। यहां बंदर समेत कई जानवरों को केमिकल ट्रिटमेंट से बचाकर शोकेस मे रखा गया है।

तीसरी मंजिल पर 56 खंभे। 
56 खंभे से देखें नजारा - पर जब आप तीसरी मंजिल पर पहुंचते हैं तो नजारा देख चौंक जाते हैं। 56 खंभो वाली बारादरी का नजारा अदभुत है। इस चौबारे में बैठकर  आप आसपास के नजारे देख सकते हैं। चांदनी रात में इस छत पर आना और भी बेहतर लगता होगा। यहां से शहर का नजारा भी शानदार दिखाई देता है। बताया जाता है कि इस किले में ऐतिहासिक फिल्म नूरजहां की शूटिंग भी हुई थी।

कैसे पहुंचे –  संग्रहालय सुबह 9.30 बजे से शाम 5.30 बजे तक खुला रहता है। टिकट 10 रुपये का है। भरतपुर का स्टेट संग्रहालय भरतपुर के मुख्य बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन से केवल 4 किलोमीटर की दूरी पर है। आप साइकिल रिक्शा या आटो रिक्शा लेकर जा सकते हैं। अब राजस्थान सरकार इस संग्रहालय कायाकल्प कराकर और भी बेहतर बनवा रही है।
- Vidyut Prakash Maurya

( BHARTPUR FORT, BARADARI,  RAJSTHAN ) 



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