Friday, August 7, 2015

दिल्ली में लें चेन्नई का सच्चा स्वाद

अगर आप दिल्ली में रहकर सच्चे दक्षिण भारतीय व्यंजनों का स्वाद लेना चाहतें और खासकर चेन्नई का तो पहुंचे सरवणभवन। सरवण भवन दिल्ली के दिल कनाट प्लेस में स्थित है। चेन्नई शहर में सरवण भवन के 20 के करीब ब्रांच हैं। पर अब चेन्नई का ये प्रसिद्ध रेस्टुरेंट न सिर्फ दिल्ली बल्कि दुनिया के कई देशों तक पहुंच चुका है।

दिल्ली में सरवण भवन में सुबह नास्ता, दोपहर का खाना या रात के डिनर के समय जा सकते हैं। मसाला डोसा  के अलावा आप यहां पर मिनी टिफिन का स्वाद लें। 125 रुपये की थाली में एक मिनी डोसा, चार मिनी इडली, उपमा और रवा केसरी ( यानी सूजी हलवा)। साथ में सांभर, चटनी तो होगी ही। ये एक टिकट में कई तमाशा जैसा डिश है। इसके अलावा यहां आप पारंपरिक तमिल थाली का भी आनंद ले सकते हैं जो 195 रुपये की है। मसाला डोसा 120 रुपये का है। डोसा का स्वाद बिल्कुल चेन्नई जैसा है। हालांकि दिल्ली में इसकी दरें चेन्नई से महंगी हैं। लेकिन उसी तरह प्लेट में परंपरागत केले के पत्ते पर व्यंजन परोसे जाते हैं। सभी दरों पर वैट और टैक्स अलग से लगता है। आप यहां पेमेंट क्रेडिट कार्ड से भी कर सकते हैं। सरवण भवन ने टेक अवे और होम डिलेवरी का भी यहां पर इंतजाम किया हुआ है। आमतौर पर दिल्ली के सरवण भवन में शाम को हमेशा भीड़ रहती है। खास तौर पर परिवार के साथ खाने वाले यहां खूब पहुंचते हैं। सरवण भवन के सांबर बनाने का अपना स्टाइल है जो उनके नाम से ही प्रसिद्ध है। यह ज्यादा तीखा नहीं होता,  इसलिए बच्चे भी आराम से खा लेते हैं।

दक्षिण भारत में सरवण भवन की 31 रेस्टोरेंट खुल चुके हैं जबकि उत्तर भारत में दो। दिल्ली में कनाट प्लेस में जनपथ और शिवाजी स्टेडियम के पास इनकी मौजूदगी है। वे साल 2003 से दिल्ली में हैं। तमिलनाडु में चेन्नई के अलावा कांचीपुरम, तूतीकोरीन में भी उनकी मौजूदगी है। विदेशों में दुबई, ओमान, मस्कट, हांगकांग समेत 12 देशों में 46 से ज्यादा आउटलेट फ्रेंचाइजी स्तर पर काम कर रहे हैं।
सरवण भवन का इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है। इसकी शुरुआत 1981 में एक रेस्टोरेट के तौर पर हुई थी। इसकी शुरुआत तमिलनाडु के तूतीकोरीन के रहने वाले पी राजगोपाल ने की थी। अब उनकी दूसरी पीढ़ी रेस्टोरेंट का कारोबार देखती है। राजगोपाल के पिता किसान थे और प्याज का कारोबार करते थे। 1973 में चेन्नई आकर उन्होंने केके नगर में  एक जनरल स्टोर खोला। बाद में 1981 में इसी इलाके में पहला सरवण भवन नामक रेस्टोरेंट खोला जो आज दुनिया का बड़ा ब्रांड बन चुका है। लोकप्रियता का ये आलाम है कि कई शहरों  सरवण भवन नाम से रेस्टोरेंट खुल गए हैं जो मूल सरवण भवन के हिस्सा नहीं हैं।  ( http://www.saravanabhavan.com/)



No comments:

Post a Comment