Friday, July 17, 2015

मस्त आटोरिक्शा है केएपीएल का क्रांति

शेखावटी क्षेत्र के शहर झुंझनू में जो आटो रिक्शा सबसे ज्यादा चलता दिखाई दिया था वह था केएपीएल का क्रांति। यह परंपरागत तीन पहिया की तुलना में थोड़ा लंबा है। पर देखने में चौड़ाई थोड़ी कम लगती है। इसमें एक सीट आगे की तरफ है तो दूसरा सीट पीछे की तरफ। पीछे की तरफ की सीट में लेग स्पेस ज्यादा दिया गया है। यहां चाहे तो सामान भी रखा जा सकता है। पीछे वाली सीट के सामने दो बड़े स्टील रॉड बांए और दाहिने तरफ लगाए गए हैं। इसे पीछे बैठने वाला आसानी से पकड़ कर बैठ सकता है। संतुलन बना रहता है। पीछे बैठने का दूसरा फायदा है कि आप पूरे शहर का दाहिने बाएं नजारा करते हुए आगे बढ़ते हैं। इस तरह के आटो रिक्शा सीकर शहर में भी चलते हुए नजर आए। थोड़ा शोध करने पर पता चला कि ये आटो रिक्शा कुरुक्षेत्र का बना हुआ है। शेखावटी के आटो वाले केएपीएल के क्रांति को अदभुत ढंग से सजा संवार कर रखते हैं। इस आटो को चारों तरफ से खूब फूलपत्तियों से संवार कर रखा गया है। कंपनी से आने वाली मूल चेसिस को आटो रिक्शा वाले अपने मनमाफिक सजा संवार कर तैयार कराते हैं। आटो वाले सवारी का ज्यादा इंतजार नहीं करते। दो आगे की सीट पर और दो पीछे की सीट पर लोग बैठे नहीं की आटो चल पड़ा मंजिल की ओर। सीटें आरामदेह है। दिल्ली के टाटा मैजिक की तरह कोई कसम कस नहीं। महिंद्रा के आटो रिक्शा की तुलना में क्रांति पतला है पर लंबा है। ये गुजरात के छकड़ा की तरह देखने में ग्लैमरस लगता है। आटो वालों ने इसे जिस तरह से सजाया हुआ है उसे देखकर इसका सौंदर्य और बढ़ जाता है। हालांकि डीजल चलित होने के कारण यह तेज आवाज करता है।

केएपीएल द्वारा निर्मित आटो रिक्शा हैं। केएपीएल यानी कुरुक्षेत्र आटोमोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड। इसका लोकप्रिय माडल है क्रांति 435 सीएल। इसमें ग्रीव्ज का डीजल इंजन लगा है। इसका फ्रंट कम चौड़ा दिखाई देता है। बनावट में ये तीन पहिया पतला और लंबा है। इस कंपनी का निर्माण केंद्र हिमाचल प्रदेश के सिरमौर में है, जबकि मुख्यालय कुरूक्षेत्र में है। कंपनी के संचालक जेएस सैनी हैं। ( http://kaplvehicles.com/ ) हालांकि क्रांति जैसा आटो रिक्शा एपीआई भी बनाती है पर शेखावटी में क्रांति की धूम है।
हालांकि शेखावटी के शहरों में केएपीएल के क्रांति के अलावा एपीआई के बने हुए भी इसी माडल के आटोरिक्शा दिखाई दे जाते हैं। पर क्रांति का जवाब नहीं। आटो वाले बताते हैं कि क्रांति का रखरखाव सस्ता पड़ता है और यह माइलेज भी बेहतर दे जाता है। गाड़ी का चेसिस मजबूत है सालों साल साथ निभाता है। तो चलें आटो रिक्शा में...आजा मेरी गाड़ी में बैठ जा...



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