Sunday, July 5, 2015

नास्ते में दही और चूड़ा - वाह क्या बात है...

भवानीपुर के उगना महादेव के मंदिर में मैं दोपहर में पहुंचा था। मंदिर के पुजारी नारायण ठाकुर जी ने कहा कि आप भोजन के वक्त आए हैं तो दही चूडा खाकर ही जाएं। उनके बेटे मुरारी ठाकुर जी ने दही चूड़ा का इंतजाम कर दिया तुरंत। दही चूडा के साथ आम और रसगुल्ले। खाकर आनंद आ गया। 

बातों बातो में वहां मौजूद एक और पुजारी शंकर कुमार शास्त्री जी ने बताया कि वे एक बार कंपटिशन में 350 मिर्ची खा गए थे। उसके बाद क्या हुआ...कई घंटे तालाब में कूद कर नहाते रहे..शरीर की गर्मी कम करने के लिए। मिथिला क्षेत्र में खाने के दौरान कंपटिशन पुरानी पंरपरा है। भोज के बाद रसगुल्ला खाने की प्रतियोगिता होती है। इसमें लोग 40 से 50 से लेकर 200 रसगुल्ले भी खा जाते हैं। 


उत्तर भारत का लोकप्रिय नास्ता है दही चूड़ा। नास्ता ही नहीं काफी लोग तो दही चूड़ा को दोपहर के मुख्य भोजन के तौर पर भी लेते हैं। यह एक सुपाच्य और पौष्टिक भोजन है जिसे तैयार करने के लिए कोई श्रम नहीं करना पड़ता। पकाने का कोई झंझट ही नहीं। ये हमारा देशी फास्ट फूड है जो पिज्जा बर्गर जैसे भोजन से लाख गुना बेहतर है। दही चूड़ा, छोला भठूरा या छोला कुलचा से भी बेहतरीन नास्ता है। इसे खाने के अपच या पेट खराब होने का कोई खतरा नहीं रहता।

चंपारण के शहरों के अलावा मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, दरभंगा, मधुबनी जिलों के शहरों में आप सुबह के नास्ते में दही और चूड़ा खा सकते हैं। तौल कर सौ ग्राम चूड़ा, दो सौ ग्राम दही और उसके साथ चीनी लें और आपका नास्ता तैयार। दोपहर में अगर दही चूड़ा खाना है तो अपने पेट के हिसाब से अपना निवाला तैयार करें। उत्तर बिहार की शादी में होने वाले भोज में भी अंत में दही चूड़ा जरूर खिलाया जाता है। इसे यहां पर शुभ माना जाता है।

जब 1979 में तीसरी क्लास में पढ़ता था तो वैशाली जिले के बिहारी-बिठौली गांव में जीतेंद्र मिश्रा जी के घर कुछ दिन रहने का मौका मिला। वहां से सुबह में नास्ते में दही चूड़ा लेने की आदत बनी, वह आज भी कायम है। वैसे बिहार में 14 जनवरी यानी मकर संक्रांति के दिन दही चूड़ा खाने का प्रचलन है। एक बार प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी उत्तर बिहार के दौरे पर आए थे तो उनके लिए दही चूड़ा का विशेष प्रबंध किया गया था। आम के मौसम में तो कई लोग आम और चूड़ा भी खाना पसंद करते हैं। वैशाली जिले में एक कहावत है- मकई के रोटी सीपिया आम, बुढिया मर गई जय सियाराम...

-    -  --विद्युत प्रकाश मौर्य  ( CURD, CHURA, BREAKFAST, DARBHANGA ) 

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