Saturday, July 25, 2015

मुरादें पूरी करती हैं मां विंध्यवासिनी

शक्ति की देवी मां विंध्यवासिनी का मंदिर उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के विंध्याचल में स्थित है। यह स्थान मुगलसराय से इलाहाबाद रेल मार्ग पर पड़ता है। इसे जागृत शक्ति पीठ माना जाता है। यह देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है। आद्य शक्ति भगवती विंध्यवासिनी का विंध्य पर्वत माला में हमेशा से निवास स्थान रहा है। महाभारत के विराट पर्व में धर्मराज युद्धिष्ठिर ने मां विंध्यवासिनी की स्तुति की है। उन्होंने कहा है कि पर्वतों में श्रेष्ठ विंध्याचल पर्वत पर आप सदैव विद्यमान रहती हैं। पद्म पुराण में देवी को मां विंध्यवासिनी कहा गया है। सृष्टि से आरंभ से ही मां विंध्यवासिनी की पूजा का आख्यान मिलता है। कहा जाता है कि त्रेता युग में भगवान राम भी सीता के साथ विंध्याचल आए थे। मार्केंडेय पुराण के दुर्गा सप्तशती के 11वें अध्याय में भी मां विंध्यवासिनी की कथा आती है। उन्होंने शुंभ और निशुंभ नामक दैत्यों का नाश किया।


हमेशा से ही विंध्य क्षेत्र में घने जंगल थे इसलिए देवी का नाम वन दुर्गा भी पड़ गया। वन को अरण्य भी कहा जाता है। इसलिए ज्येष्ठ मास के शुक्ल  पक्ष की षष्ठी तिथि को मां की विशेष पूजा की जाती है। इसे अरण्य षष्ठी भी कहा जाता है।
मां का मंदिर गंगा की जल धारा और विंध्य पर्वत श्रंखलाओं के बीच स्थित है। परिसर में बड़ा ही मनोरम वातावरण बन पड़ता है। कई भक्त मां गंगा के जल में स्नान के बाद विंध्यवासिनी के दर्शन करते हैं। मां विंध्यवासिनी के दरबार में लोग मन्नते मांगने दूर दूर से आते हैं। यहां लालू प्रसाद यादव , अमिताभ बच्चन जैसी हस्तियां हाजिरी लगाने पहुंच चुकी हैं।
नवरात्र के समय मां के दर्शन का विशेष प्रावधान है। इसलिए दोनों नवरात्र के नौ दिनों में मां विंध्यवासिनी के मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। नवरात्र के दिनों में मां के श्रंगार के लिए मंदिर के कपाट चार दिन बंद किए जाते हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में ज्योतिष और तांत्रिक तंत्र-मंत्र की साधना के लिए भी इन दिनों मां विंध्यवासिनी देवी के मंदिर के आसपास डेरा डालते हैं।  यहां अष्टमी के दिन दक्षिण मार्गी और वाममार्गी तांत्रिकों का जमावड़ा लगता है।

पताका दर्शन - कहा जाता है कि नवरात्र में मां मंदिर छोड़कर आसमान मेंजाकर पताका में वास करती हैं। इसलिए इन दिनो श्रद्धालु पताका के दर्शन करके भी धन्य हो जाते हैं। मां मंदिर सुबह 4 बजे से रात्रि 12बजे तक खुला रहता है। रात्रि दर्शन में मां का सुंदर श्रंगार देखने को मिलता है।
काली खोह – विंध्याचल में थोड़े दायरे में तीन देवियों के मंदिर हैं। विंध्यवासिनी देवी के मंदिर से दो किलोमीटर की दूरी पर काली खोह गुफा में महाकाली और अष्टभुजा पहाड़ी पर मां अष्टभुजा देवी का मंदिर है। कालीखोह गुफा में जाने का रास्ता अत्यंत संकरा है।

कैसे पहुंचे - विंध्याचल शहर गंगा तट पर स्थित है। यहां विंध्याचल नाम से रेलवे स्टेशन भी है , जहां कुछ रेलगिड़यों का ठहराव है। आप वाराणसी या इलाहाबाद से चलने वाली नियमित बस सेवाओं से भी विंध्याचल पहुंच सकते हैं। वाराणसी से विंध्याचल की दूरी सड़क मार्ग से 65 किलोमीटर है। मिर्जापुर से विंध्याचल की दूरी तकरीबन 8 किलोमीटर है जबकि इलाहाबाद से विंध्याचल की दूरी 82 किलोमीटर है। आप मिर्जापुर में रुककर मां के दर्शन करने जा सकते हैं।


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