Monday, July 13, 2015

बोतलबंद पानी के नाम पर भारी लूट

आप सफर में होते हैं तो पीने के पानी के लिए अक्सर बोतलबंद पानी खरीदते हैं। रेलवे में रेल नीर 15 रुपये में तो बाकी जगह पर एक लीटर पानी 20 रुपये में मिलता है। क्या आपने कभी सोचा है कि इस पानी के नाम पर आपकी कितनी जेब काटी जा रही है। एक लीटर प्यूरीफाई किया हुआ पानी महज एक से दो रुपये का पड़ता है। पर हम इसकी एवज में चुकाते हैं कई गुना कीमत।

पांच रुपये में एक लीटर शुद्ध पानी 

हाल के राजस्थान के दौरे में मैंने देखा कि वहां के कई बस स्टैंड में जीरो बी कंपनी ओर से पानी की मशीने लगाई गई हैं। यहां पर एक लीटर शीतल आरओ वाटर पांच रुपये में खरीदा जा सकता है। इसमें बोतल आपको देना होगा। अगर आप बोतल समेत खरीदना चाहते हैं दो 10 रुपये देने होंगे। आप एक रुपये में गिलास भर पानी और तीन रुपये में आधा लीटर पानी भी खरीद सकते हैं। राजस्थान के झुंझनू, सीकर, चुरू जैसे बस स्टैंड में जीरोबी के स्टाल लगे हैं। जहां से गरीब तबके लोग भी पानी खरीद पाते हैं। इस तरह की व्यवस्था देश भर में लागू होनी चाहिए। देश के हर कोने में लोग पानी खरीदने के नाम पर लूटे जाते हैं। टूरिस्ट प्लेस और पहाड़ों पर तो पानी और भी महंगा बिकता है। अगर जगह जगह इस तरह की वाटर मशीनें लगा दी जाएं तो पानी को लेकर चल रही मुनाफाखोरी पर लगाम लग सकता है।

बारिश के पानी का इस्तेमाल - राजस्थान के चुरू जिले के तीर्थ स्थल सालासर में पीने के पानी की काफी दिक्कत है। यहा की तमाम धर्मशालाओं में वर्षा जल संचय का इंतजाम है। बारिश के पानी को संग्रह करने के बाद सालों भर पीने के काम में लाया जाता है। जाजोदिया धर्मशाला के संचालक बताते हैं कि पहली बारिश के पानी को नहीं जमा करते हैं। क्योंकि इस पानी में गंदगी रहती है। पहली बारिश से छत साफ हो जाता है। उसके बाद होने वाली बारिश के पानी के संग्रह करके अंडरग्राउंड टैंक में जमा कर लिया जाता है। जल का ये संकट पूरे शेखावटी इलाके में है। इसलिए शेखावटी के लोग पानी की कीमत जानते हैं।


प्लास्टिक की बोतलें बड़ा संकट-  
भारतीय रेलवे की भी योजना देश भर में रेलवे स्टेशनों पर पानी के लिए आरओ मशीनें लगाने की है, जिससे लोग अपने बोतल में मुफ्त में पानी भर सकेंगे। दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर इसकी शुरुआत भी हो गई है। रेलवे के सामने एक बड़ा संकट पानी पीने के बाद फेंकी जाने वाली प्लास्टिक की बोतलें है। ये बोतलें कचरा के तौर पर बड़ा संकट बनती जा रही हैं। अगर पानी लोग वाटर एटीएम से ले लेंगे और अपनी बोतल लेकर आएंगे तो प्लास्टिक के कचरे से भी निपटा जा सकेगा। पर पानी के इस इंतजाम में हमे अभी मीलों का सफर करना है। 
- vidyutp@gmail.com

(SIKAR, JAL KUTIR, PURE WATER, RAJSTHAN ) 

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