Saturday, June 6, 2015

इक्कीसवीं सदी और कोईलवर का पुल

1857 में देश का पहला स्वतंत्रता संग्राम हुआ और उसके ठीक पांच साल बाद पटना और आरा के बीच सोन नदी पर कोईलवर पुल का उदघाटन हुआ। ये एक रेल सह सड़क पुल है। संभवतः ये देश का सबसे पुराना रेल पुल हो जो 150 साल बाद भी शान से अपनी सेवाएं दे रहा है। नई दिल्ली से कोलकाता जाने वाली राजधानी इस पर से सरपट गुजर जाती है। इसके बाद कई पुल बने जो जर्जर हाल में पहुंच चुके हैं पर कोईलवर का पुल सफल इंजिनयरिंग का अदभुत नमूना है। उन्नीसवीं सदी का ये पुल इक्कीसवीं सदी में भी गर्व से अपनी सेवाएं दे रहा है।

देश का सबसे लंबा रेल सह सड़क पुल - 1978 के बाद मैं अनगिनत बार इस पुल से गुजरा हूं। नीचे नीचे सड़क मार्ग है और उपर उपर रेल मार्ग के लिए दो लेन बने हैं। इस पुल का नाम बिहार के जाने माने स्वतंत्रता सेनानी प्रोफेसर अब्दुल बारी के नाम पर रखा गया है। आरा की तरफ से जाने पर कोईलवर रेलवे स्टेशन के ठीक बाद पुल शुरू हो जाता है। इस पुल को देश का सबसे बड़ा रेलवे पुल होने का भी श्रेय प्राप्त था। ये सोन नदी पर बना आखिरी पुल भी है। इसके बाद सोन नदी गंगा में मिल जाती है।

ईस्ट इंडिया रेलवे कंपनी ने 1851 में सोन नदी पर रेल पुल बनाए जाने के लिए सर्वे की शुरुआत की। ब्रिटिश सरकार ने इस पुल का निर्माण 1856 में शुरू कराया। पांच साल में पुल बनकर तैयार हो गया। इसे रेल सह सड़क पुल को 1862 में यातायात के लिए खोल दिया गया। 2012 में इस पुल ने शानदार 150 साल पूरे किए। लगभग डेढ़ किलोमीटर (1440 मीटर) लंबे इस पुल का उदघाटन तत्कालीन वायसराय लार्ड एल्गिन ने किया था। इस पुल का डिजाइन जेम्स मिडोज रेनडेल और सर मैथ्यु डिग्बी वाइट ने किया था। रिचर्ड एटनबरो की फिल्म गांधी में इस पुल की छोटी सी झलक देखी जा सकती है। 
कोईलवर पुल से सोन नदी का नजारा। 

आजकल सड़क पर ट्रैफिक का बोझ बढ़ जाने के कारण इस पुल पर कई बार जाम की स्थित बन आती है। हाल के सालों में पुल के आसपास से लगातार बालू निकाले जाने के कारण पुल की सेहत को खतरा हुआ है। 
  
एक बीमार पुल की दास्तां-  अब इसी के पास एक और पुल की बात कर लें पटना और हाजीपुर को जोड़ने वाले सड़क पुल महात्मा गांधी सेतु की शुरुआत 1984 में हुई। ये पुल 14 साल बनकर तैयार हुआ। इसे देश के सबसे लंबे नदी पुल होने का श्रेय मिला। पुल की कुल लंबाई 5.5 किलोमीटर है। इसे गैमन इंडिया ने बनाया। पर पुल इतना घटिया बना कि तीन दशक भी ट्रैफिक को नहीं झेल सका। पिछले कई सालों से ये पुल मरणासन्न हाल में है। 150 सालों में विज्ञान और तकनीक ने काफी प्रगति की है,  पर हमें कोईलवर के इस पुल की निर्माण तकनीक से कुछ सीखने की जरूरत है।


सबसे लंबा नदी पुल - महात्मा गांधी सेतु पटना से हाजीपुर को जोड़ने को लिए गंगा नदी पर उत्तर-दक्षिण की दिशा में बना एक पुल है। यह दुनिया का सबसे लंबा एक ही नदी पर बना सड़क पुल है। इसकी लंबाई 5,575 मीटर यानी पौने छह किलोमीटर है। प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने इसका उद्घाटन मई  1982 में किया था। हालांकि तब यह पुल अधूरा ही था। इस पर यातायात जनवरी 1983 में आरंभ हो सका। पुल का निर्माण 1969 में आरंभ हुआ था। यानी निर्माण में कुल 15 साल लग गए। इसका निर्माण गैमन इंडिया लिमिटेड ने किया था। वर्तमान में यह राष्ट्रीय राजमार्ग 19 का हिस्सा है।


कैंटलीवर सिगमेंट तकनीक हुई फेल - तकनीक के लिहाज से महात्मा गांधी सेतु कैंटलीवर सिगमेंट ब्रिज है। इसमें कुल 46 पिलर (पाया) हैं। पुल में 45 सिगमेंट का इस्तेमाल किया गया है। कैंटलीवर सिगमेंट का इस्तेमाल इस मेगा पुल के लिए किया गया था। पर इस तकनीक से देश में कुल तीन ही पुल बने। गोवा का मंडोवी ब्रिज 16 साल बाद टूट गया जबकि एक और कैंटलीवर सिगमेंट ब्रिज जुआरी ब्रिज पर खतरे के कारण यातायात बंद कर दिया गया है।
-    विद्युत प्रकाश मौर्य


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