Saturday, June 20, 2015

महज एक लाख में बनाई सोलर कार- 40 हजार किलोमीटर का सफर

एक ऐसी कार जिसको चलाने के लिए डीजल या पेट्रोल की कोई जरूरत नहीं है। यह सूर्य की रोशनी से फर्राटा भरती है। इसे बनाया बेंगलुरु के बनशंकरी इलाके में रहने वाले सैय्यद सज्जाद अहमद ने। इस कार की लागात लगभग शून्य है। सरकारें कौशल विकास की बात करती हैं। पर अहमद के सोलर कार प्रोजेक्ट को लेकर किसी सरकार ने रूचि नहीं दिखाई। उनकी इस कार के निर्माण में महज एक लाख रुपये खर्च आया है।

 वे इस कार को सफलतापूर्वक 40 हजार किलोमीटर तक चला चुके हैं। अहमद ने 2005 में सोलर आटो रिक्शा बनाया। इससे पहले 2004 में वे सोलर कार बना चुके थे। उनके पास सोलर बाइक भी है। पहली बार 2004 में अपनी सोलर कार लेकर बेंगलुरु से चेन्नई चले गए तो लोग कौतूहल से देखते रहे।

 वे 2010 में सोलर कार लेकर दिल्ली चले गए। इस दौरान अन्ना हजारे के आंदोलन का समर्थन किया। मैं उनसे पूछता हूं कार को लेकर ट्रैफिक पुलिस वाले रजिस्ट्रेशन के बारे में सवाल नहीं पूछते। अहमद कहते हैं सोलर कार को लोग कौतूहल से देखते हैं और आगे जाने देते हैं। अब तक वे अपनी सोलर कार को 40 हजार किलोमीटर सफलता पूर्वक चला चुके हैं। सौर ऊर्जा से चलने वाले वाहनों के निर्माण का ख्याल उन्हें 30 साल पहले आया। 2006 में एक शो में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम उनके काम की तारीफ कर चुके है।


ऐसी है सोलर कार - इस कार में बोनट, पीछे के हिस्‍से और इसकी छत सहित तीन जगहों पर सोलर प्‍लेट का प्रयोग किया गया है। इस प्‍लेट्स की मदद से कार में लगी बैटरी चार्ज होती है जो कि कार को शक्ति प्रदान करती है जिससे कार आसानी से चलती है। उनकी कार 20 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से चलती है। वे कहते हैं कि इसकी स्पीड 50 किलोमीटर तक बढाई जा सकती है। कार में ज्यादातर पूर्जे लगाए गए हैं वे स्थानीय स्तर पर ही निर्मित हैं इसलिए इसमें खर्च काफी कम आता है।

सोलर कार से चले दिल्ली। ( फोटो सौ - द हिन्दू) 

सज्जाद की पढ़ाई सिर्फ 12वीं तक है पर आविष्कार उनका जुनून है। अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा वे शोध कार्य में लगा देते हैं।  अहमद के मुताबिक 25 फीसदी कमाई शोध में और 25 फीसदी समाजसेवा में जाती है। अहमद बताते हैं कि इस कार के बारें में सरकार बिलकुल भी गंभीर नहीं है इस कार को कई बार नेता और मंत्री भी देख चुके है लेकिन उन्‍होनें इसके लिए कुछ भी नहीं किया।
सज्जाद अहमद। 

बेंगलुरु के इस महान वैज्ञानिक सज्जा अहमद से मेरी मुलाकात सीतामढ़ी में राष्ट्रीय युवा योजना के राष्ट्रीय एकता शिविर के दौरान होती है। वे जनकपुर जाने के क्रम में मेरे साथ वाली सीट पर बस में बैठे हैं। पूरे रास्ते अपने खोज के बारे में चर्चा करते रहे। सरकारी मिशनरी से उन्हें काफी शिकायत है। 
अगर उनकी कार और रिक्शा का व्यवासायिक उत्पादन हो तो पर्यावरण संरक्षण में काफी मदद मिल सकती है। 

सज्जाद को वैज्ञानिक खोज के साथ ही समाज सेवा का भी जुनून है जो उन्हें इस शिविर में खींच लाया है। हालांकि सरकारी एजेंसियों से उन्हें मदद नहीं मिल रही है पर अपनी खोज को लेकर वे ना उम्मीद नहीं हैं।

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