Saturday, May 9, 2015

उन फेरी वालों के मेहनत को सलाम

एक घंटे में औसतन 42 से 44 किलोमीटर चलती है मुंबई की लोकल ट्रेन और दिल्ली की मेट्रो ट्रेन महज 32 किलोमीटर चल पाती है। और किराया मुंबई लोकल का दोगुना है दिल्ली मेट्रो में।  मुंबई के खार घर से चलने वाली लोकल ट्रेन सीएसटी स्टेशन पहुंच जाती है महज एक घंटे 10  मिनट में। दूरी है 43 किलोमीटर। यानी लोकल ट्रेन की स्पीड हुई मेट्रो से तेज। लोकल ट्रेन में किराया तो कम है ही, साथ ही ये हर वर्ग के लोगों को अपने अंदर समेट कर चलती है। पैसे वाले लोगों के लिए फर्स्ट क्लास है तो वेंडरों के लिए और महिलाओं के लिए भी इसमें आरक्षित डिब्बा होता है। तभी तो मुंबई की लाइफलाइन है लोकल ट्रेन।

खारघर से मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस जाने के लिए लोकल ट्रेन में चढ़ा हूं। भीड कम होने पर पर सीएसटी जाते समय वेंडर डिब्बे में चढ़ जाता हूं। गोवंडी स्टेशन पर चढते हैं दो लोग। उनके पास बड़ा सा गट्ठर है। पूछने पर बताया इलाहाबाद के रहने वाले हैं और यहां घूम घूम कर नाइटी बेचने का धंधा करते है। गोवंडी स्टेशन के पास सेठ की  दुकान से माल उठाते हैं। दिन भर फेरी लगाकर बेचते है। शाम को बचा हुआ माल सेठ को वापस। सेठ ने रहने की जगह भी दे रखी है मुफ्त में। दोनों फेरीवाले इलाहाबाद के रहने वाले हैं। बताते हैं महीने में 10 से 15 हजार की कमाई हो जाती है। कहीं मजदूरी करने से तो अच्छा है। मैं मन ही मन उनकी मेहनत को सलाम करता हूं। मैं उनसे धारावी के बारे में पूछता हूं।

 वे लोग धारावी की गलियों में कपड़े बेचने जाते हैं। कुर्ला से थोडी दूर सायन और माहिम के बीच में स्थित धारावी देश की सबसे बड़ी झुग्गी झोपड़ी कालोनी है। पर अब बदल रहा है धारावी।
धारावी मुंबई का एक झुग्गी बस्ती क्षेत्र है। यह पश्चिम माहिम और पूर्व सायन के बीच में है और यह 200  हेक्टेयर (1.7 वर्ग किलोमीटर करीब 500 एकड़ ) के एक क्षेत्र में है। धारावी की आबादी 10 लाख से अधिक है। अनुमान के अनुसार धारावी में हर साल 3600 करोड़ रुपये से भी अधिक का व्यापार होता है। यहां काम करने वाले अधिकतर उद्योग आधिकारिक रूप से पंजीकृत नहीं हैं। 2009 में यूएन की एक रिपोर्ट ने कहा था कि कराची की उरंगी एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती है। दोनों फेरीवाले भाई रे रोड पर उतर जाते हैं। वे बताते हैं कि हर रोज किसी नए इलाके में फेरी लगाने जाते हैं। जब मर्जी हो जिधर चल दिए। शाम को अपने घोंसले में वापस। मुंबई लोकल सरपट भागी जा रही है। डॉकयार्ड रोड, सेंडर्स रोड, मसजिद के बाद सीएसटी। 

हमलोग सीएसटी से बस लेते हैं गेटवे आफ इंडिया के लिए। अनादि की गेटवे आफ इंडिया पर दूसरी यात्रा है। एक दूरबीन किराए पर लेते हैं और कोलाबा और समंदर में आते जाते स्टीमर का खूब नजारा करते हैं। पूछ बैठते हैं कि यहां मुंबई का बोर्ड क्यों लगा हुआ है। किसी रेलवे स्टेशन की तरह। मैं बताता हूं कि ताकि कोई जहाज आए तो उसे पता चल जाए कि वह कहां पहुंचा है।



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