Tuesday, May 12, 2015

हर ‘आम’ में है कुछ खास

मुंबई के बाजार में अलफांसो आम। 
आम फलों का राजा है। आम सिर्फ स्वाद में ही बेहतर नहीं है बल्कि यह अनेक गुणों का खजाना है।  महाराष्ट्र में रत्नागिरी जिले का हापुस यानी अलफांसो को देश का सबसे बेहतरीन आम माना जाता है। हालांकि देश के दूसरे राज्यों को लोग इससे सहमत नहीं हो सकते। गुजराती केशर को सबसे सुस्वादु आम मानते हैं। बनारसी लंगड़ा के आगे किसी को नहीं रखते। लखनऊ के लोग मलिहाबाद की दशहरी को देश का राजा मानते हैं। बिहार पहुंचे तो सफेद मालदह का जवाब नहीं।


बात हापुस की करें तो, हाफूस (अंग्रेजी में ALPHANSO  अलफांसो) , मराठी में हापुस, गुजराती में हाफुस  और कन्नड़ में आपूस कहा जाता है। यह आम की एक किस्म है जिसे मिठास, सुगंध और स्वाद के मामले में अक्सर आमों की सबसे अच्छी किस्मों में से एक माना जाता है। यूरोपीय भाषाओं में इसका नाम अलफांसो, अफोंसो दि अल्बूकर्क (पुर्तगाली: Afonso De Albuquerque) के सम्मान में रखा गया है। वैसे हापुस कर्नाटक में भी होता है, पर महाराष्ट्र के कोंकड़ क्षेत्र के हापुस का जवाब नहीं।

मार्च के महीने में रत्नागिरी के राजा हापुस आम की आवक शुरू हो जाती है। मुंबई और आसपास के बाजारों में शुरुआत में इसके दाम 500-600 रुपए दर्जन रहते हैं। यानी एक आम 50 रुपये का। इस बार महंगाई के कारण हापुस आम, आमजन के लिए नहीं। हापुस के स्वाद के दीवाने बड़े बड़े लोग हैं। लम्बे समय तक विदेश में रहने वाली बॉलीवुड में वापसी करने वाली अभिनेत्री माधुरी दीक्षित को आम बेहद पसंद हैं और उन्होंने विदेश में रहने के दौरान स्थानीय आम हापुस की कमी महसूस की। माधुरी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, मुम्बई में आम का मौसम चल रहा है। भूल गई थी कि हापूस आम कितना अच्छा है।

यूपी का लंगड़ा दशहरी और चौसा 

लंगड़ा आम मूल रूप से वाराणसी के नजदीकी इलाके में ही होता है। आम की इस किस्म, जैसा कि इससे संबद्ध कहानी कहती है, का नाम एक लंगड़े साधु के नाम पर रखा गया, जिसने पहली बार इस आम की खेती की। अब बनारस के आसपास लंगडा आम के बाग बगीचे कम हो गए हैं इसलिए उत्पादन भी कम हो रहा है। अबकी वर्ष तो लंगड़ा ही नहीं बल्कि देशी आम की पैदावार भी कम हुई है। दिल्ली के आसपास सहारनपुर का चौसा आम पहुंचता है। यूपी के सहारनपुर के आसपास चौसा आम के बड़े बड़े बाग हैं।
बनारस का लंगड़ा आम

भारतीय आम की विदेशों में खूब मांग है। साल 2010 में मलिहाबाद के दशहरी आम को पेटेंट का दर्जा मिला। उसके बाद इसकी मांग भी विदेशों में बढ़ गई। दशहरी, चौसा और लंगडा के बल पर उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा आम उत्पादक राज्य है।

अमरोहा का आम
यूपी के सहारनपुर अमरोहा के आसपास चौसा आम के बाग हैं। चौसा आम का निर्यात दुबई और सउदी अरब देशों को होता है। अमरोहा शहर का नाम ही आम के नाम पर पड़ा है। संस्कृत में आम्र वनम का जिक्र आता है। यहां आज भी आम के बड़े बड़े बाग हैं। देश-दुनिया में अमरोहा आम के नाम से पहचाना जाता है। 

बागपत का 'रटौलआम



उत्तर प्रदेश के मलीहाबाद का दशहरी। 
 रटौल के आम की बदौलत बागपत की पहचान देश के साथ विदेशों में भी है।रटौल से हर साल लाखों टन आम का निर्यात देश विदेशों में किया जाता है। खेकड़ा तहसील का रटौल गांव आम के लिए विश्व विख्यात है। यहां मुंबईदशहरीजुलाई वालाचौसालंगड़ातोता परीकच्चा मीठारामकेलाआदि आम की लगभग साढे पांच सौ प्रजातियां होती थी। जो अब सिमट कर मात्र आधे से भी कम रह गई हैं। यहां का रटौल प्रजाति का आम तो अपने लजीज स्वाद व सुगंध के लिए विश्व विख्यात है।

बिहार का मालदह - बिहार के भागलपुर के सफेद मालदह आम की जबरदस्त मांग रहती है। मालदह आम कोलकाता सहित देश के अन्य स्थानों के बाजारों में बिकने जाता है। वहीं पटना के पास दीघा का दूधिया मालदह आम अपने स्वाद के लिए जाना जाता है। अमेरिका, इजिप्ट, अरब, इंडोनेशिया, जापान सहित करीब सभी पड़ोसी देशों में सफेद मालदह आम की मांग रहती थी। पतला छिलका, काफी पतली गुठली और बिना रेशे वाले गुदे के कारण यह हर किसी के दिलों पर राज करता है। पर अब दीघा क्षेत्र में आम के बगीचे कम हो गए हैं।

हर आम की अपनी मिठास है। पर उत्तर बिहार में एक आम होता है सिपिया उसका स्वाद बाकी सबसे अलग होता है।  वैशाली जिले में एक कहावत है- मकई के रोटी , सिपिया आमबुढिया मर गई जय सीताराम।


पाकिस्तान का सिंदड़ी
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में पैदा होने वाले सिंदड़ी आम भी लोकप्रिय है। सिंध के कस्बे सेवण शरीफ में होने वाले सिंदड़ी आम का स्वाद काफी कुछ दशहरी जैसा होता है। बस इसका रंग थोड़ी सी ललाई लिए हुए होता है। दमादम मस्त कलंदर वाले गीत में सिंदड़ी दा सेवण दा का नाम आता है। हालांकि वह नाम सूफी संतों के लिए है। पर वहां का आम भी हमेशा से लोकप्रिय है। पाकिस्तान का यह आम भी अंतराष्ट्रीय बाजार में अपनी जगह बनाता है। खास तौर पर खाड़ी देशों में सिंदड़ी आम की मांग रहती है।


कहां कौन सा आम

अलफांसो या हापुस – महाराष्ट्र
केशर – गुजरात
चौसा – यूपी
दशहरी - यूपी
लंगडा - यूपी
सफेद मालदह – बिहार, बंगाल


नया शोध - आम है सुपर फ्रूट

अभी तक हम लोकप्रिय फल आम को फलों का राजा कह देते थे पर एक नए शोध के मुताबिक यह कोई आम फल नहीं बल्कि सुपर फ्रुट है। एक नए शोध में आम के खास फायदों का पता चला है।
आम में कैंसर रोधी गुण होते हैं। यह मोटापा घटाने में सहायक है। जो लोग ऐसा भोजन करते हैं जिससे मोटापा बढ़ता है उन्हें आम खाने से वजन कम करने में लाभ मिलता है। शोध के मुताबिक आम फैट सेल्स को कम करता है। साथ ही स्तन कैंसर के ट्यूमर को भी कम करने में सहायक पाया गया है। सैन डियागो में इस साल एक्सपेरिमेंटल बायोलोजी कान्फ्रेंस में पढ़े गए शोध पत्र के मुताबिक आम आंत संबंधी रोग में भी लाभकारी है। हालांकि शोधकर्ताओं ने कहा है कि अभी मनुष्यों को लेकर इस मामले में और शोध किए जाने की जरूरत है। 
अगर हम 400 ग्राम आम प्रतिदिन खाते हैं अगले 10 दिनों में इसके काफी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं। इससे पहले आम पर हुए एक शोध में पाया गया था कि भरपूर मिठास से भरा ये फल रक्त में शर्करा के स्तर को भी कम करता है। यानी आप डायबिटिक भी हैं तो बेतकल्लुफ होकर आम खाइए।

ये हैं आम खाने के फायदे

- कई तरह के कैंसर का खतरा कम होता है
- मोटापा घटाने में सहायक है
- उत्तेजना को कम करता है
- सेहत को बेहतर करने वाले तत्वों से भरपूर है
- शरीर में उपापचय गतिविधियों को बढ़ाता है

- शरीर में ब्लड शुगर की मात्रा को कम करता है।

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