Thursday, April 2, 2015

जुझार सिंह पन्नू के साथ श्री हुजुर साहिब ( नांदेड़) की ओर

भुसावल में सुबह का नास्ता 
अमृतसर से नांदेड़ को जोड़ती है दैनिक चलने वाली सचखंड एक्सप्रेस। बड़ी संख्या में हर रोज पंजाब के श्रद्दालु हजुर साहिब के लिए इस ट्रेन से रवाना होते हैं। एक दिन दिल्ली से हम भी इस रेल के मुसाफिर बन गए। नई दिल्ली से ट्रेन नियत समय पर खुली।  हमारे कोच में पांच साल के जुझार सिंह पन्नू भी हैं जो अपने परिवार के साथ हुजुर साहिब जा रहे हैं। अनादि उनसे दोस्ती करना चाहते हैं। जुझार सिंह बच्चे हैं पर नाम बड़ो जैसा भारी भरकम है। पगड़ी भी बड़ों जैसी ही है। भुसावल जंक्शन में ट्रेन महाराष्ट्र में प्रवेश कर जाती है। सुबह सुबह प्लेटफार्म पर खाने पीने की बहार है। इडली, डोसा, पकौड़े, बड़ा पाव, खम्मण, ढोकला  सब कुछ 20 रुपये की प्लेट। और भाई भुसावल है तो केले तो सस्ते होंगे ही यहां। पूरे देश में केला भुसावल से जाता है।

मनमाड जंक्शन पर लंगर। 
मनमाड जंक्शन में सचखंड एक्सप्रेस 20 मिनट रुकती है। यहां इसका इंजन पीछे की ओर लगता है। सचखंड एक्सप्रेस के प्लेटफार्म पर लंगर लगता है हर रोज। मनमाड के एक गुरुद्वारे की ओर से लंगर में दाल रोटी मिलती है श्री हजुर साहिब की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए। जिन्हें मालूम था वे कटोरी और ग्लास में दाल भर कर लाए। लोग श्रद्धा से दान पात्र में रुपये भी देते जाते हैं।

ट्रेन आगे की ओर चल पड़ती है। औरंगाबाद, जलाना, परभणी होते हुए। मराठवाड़ा क्षेत्र के खेत ट्रेन की खिड़की से नजर आते हैं। खेतों में हरियाली नजर नहीं आ रही है। कहीं कहीं वर्षा जल संचय के लिए तालाब बने हैं। सहयात्री बताते हैं कि पिछले कई सालों से मराठवाड़ा से इंद्र देवता मानो रूठ गए हैं। बारिश काफी कम हो रही है। पूरी खेती बारिश के भरोसे है। खेतों में उपज 10 फीसदी भी नहीं हो रही है। जमीन के भाव पूरे महाराष्ट्र की तुलना में सबसे कम हैं। 

परभणी जिले में बसंतराव नाइक कृषि विश्वविद्यालय का विशाल प्रवेश द्वार नजर आता है। इसी जिले में परली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र है जहां से स्व गोपीनाथ मुंडे लोकसभा का चुनाव जीते थे। अब उप चुनाव में उनकी बेटी प्रीतम मुंडे जीत कर पहुंची हैं।

ट्रेन समय पर हुजुर साहिब नांदेड पहुंच जाती है। ये महाराष्ट्र का आखिरी जिला है। इसके आगे रेल मार्ग तेलंगाना में प्रवेश कर जाता है। रेलवे स्टेशन के बाहर कई बसें लगी हैं जो श्रद्धालुओं के निःशुल्क सचखंड साहिब और लंगर साहिब ले जा रही हैं। एक बस में हम भी बैठ जाते हैं। रास्ते में एनआरआई निवास ( वातानुकूलित) पंजाब भवन ( वातानुकूलित) गुरू रामदास सराय, गुरु नानक देव जी यात्री निवास, रंजीत सिंह यात्री निवास आता है। हम सचखंड साहिब के स्वागत कक्ष पर पहुंचकर आवास सुविधा की मांग करते हैं। वे हमे वापस रंजीत सिंह यात्री निवास जाने को कहते हैं। हमें वहां कमरा नहीं मिलता है।  एक एक कर सभी यात्री निवास में हम जाते हैं कहीं जगह नहीं मिलती है।

सुंदर गुरुग्रंथ साहिब भवन -  अंत पहुंचते हैं गुरुग्रंथ साहिब भवन। यहां हमें शानदार कमरा महज 200 रुपये प्रतिदिन पर मिल जाता है। इस वृताकार भवन में ए से लेकर एच तक आठ ब्लाक बने हैं। बीच में संग्रहालय बना है चारों तरफ श्रद्धालु निवास। लॉन में अप्रतिम हरितिमा का वास है। क्यारियों में शानदार फूल खिले हैं। मन खुश हो जाता है हरियाली के बीच। सफर की थकान मिटाने के बाद हम शाम को सचखंड साहिब पहुंचते है मत्था टेकने के लिए।    
- vidyutp@gmail.com

( SACHKHAND EXPRESS, NANDED, MAHARASTRA, SIKH TEMPLE ) 

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