Wednesday, February 26, 2014

कालीघाट – देवी का प्रचंड रूप देखें

कोलकाता का कालीघाट क्षेत्र अपने काली माता के मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। कालीघाट काली मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है। हिन्दू धर्म के पुराणों के अनुसार जहां-जहां सती के अंग के टुकड़े, धारण किए वस्त्र या आभूषण गिरे, वहां-वहां शक्तिपीठ अस्तित्व में आए। ये अत्यंत पावन तीर्थस्थान कहलाए।

सती के पांव की उंगली गिरी थी यहां - कालीघाट में देवी काली के प्रचंड रुप की प्रतिमा स्थापित है। इस प्रतिमा में देवी काली भगवान शिव के छाती पर पैर रखी हुई हैं। उनके गले में नरमुण्डों  की माला है। उनके हाथ में कुल्हाड़ी है। सुंदर मंदिर के अंदर माता काली की लाल-काली रंग की कास्टिक पत्थर की मूर्ति स्थापित है। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव के ताण्डव के समय सती के दाहिने पैर की ऊंगली इसी जगह पर गिरी थी।


एक अनुश्रुति के अनुसार देवी किसी बात पर गुस्‍सा हो गई थीं। इसके बाद उन्‍होंने नरसंहार शुरू कर दिया। उनके मार्ग में जो भी आता‍ वह मारा जाता। उनके क्रोध को शांत करने के लिए भगवान शिव उनके रास्‍ते में लेट गए। देवी ने गुस्‍से में उनकी छाती पर भी पांव रख दिया। इसी दौरान उन्‍होंने शिव को पहचान लिया। इसके बाद ही उनका गुस्‍सा शांत हुआ और उन्‍होंने नरसंहार बंद कर दिया।

ये मंदिर 1809 का बना हुआ बताया जाता है। कालीघाट शक्तिपीठ में स्थित प्रतिमा की प्रतिष्ठा कामदेव ब्रह्मचारी (संन्यास पूर्व नाम जिया गंगोपाध्याय) ने की थी। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक दस महाविद्याओं में प्रमुख और शक्ति-प्रभाव की अधिष्ठात्री देवी काली का प्रभाव लाखों कोलकाता वासियों के मन पर है। 

मां काली का मुख काले पत्थरों से निर्मित है। जिह्वा, हाथ और दांत सोने से मढ़े हुए हैं। जय काली कलकत्तेवाली तेरा वचन न जाए खाली..... कलकत्ता में काली की दया से आदमी भूखा नहीं सोता, जैसे मुहावरे और शक्ति की देवी की इसी सोने की जीभ के कारण ही पैदा हुई हैं। गर्भगृह के ठीक सामने बने नाट्य मंदिर से देवी की प्रतिमा का भव्य दर्शन मिलता है। 1836 में धार्मिक आस्था संपन्न जमींदार काशीनाथ राय ने इसका निर्माण कराया था। मंदिर में ही बने जोर बंगला में देवी पूजन का कर्मकांड होता है। यहां काली के अलावा शीतला, षष्ठी और मंगलाचंडी के भी स्थान है।


सचिन तेंदुलकर ने की थी पूजा - महानगर के दक्षिणी हिस्से में गंगा के तट पर बसे कालीघाट में न सिर्फ कोलकाता वासी बल्कि दूर दूर से श्रद्धालु यहां पूजा अर्चना करने आते हैं। 99 शतक लगाने के बाद क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने भी यहां आकर मां की पूजा की थी।

अघोर साधना और तांत्रिक साधना के लिए प्रसिद्ध- कालीघाट का मंदिर अघोर साधना और तांत्रिक साधना के लिए भी प्रसिद्ध है। कालीघाट परिसर में मां शीतला का मंदिर भी है। मां शीतला को भोग में समिष भोज चढ़ाया जाता है। यानी मांस, मछली अंडा सब कुछ।  मंदिर में मंगलवार और शनिवार को श्रद्धालुओं की भीड़ ज्यादा होती है। 

खुलने का समय -  कालीघाट मां का मंदिर सुबह 5 बजे खुल जाता है।  दोपहर 12 से 3.30 बजे तक बंद रहता है। शाम को 5 बजे से रात्रि 10 बजे तक फिर मंदिर खुला रहता है। अगर आप मंदिर दर्शन करने आए हैं तो यहां पंडों से सावधान रहें। विजयादशमी और बंगला नव वर्ष के दिन यहां अपार भीड़ उमड़ती है।
काली घाट स्थित मिशनरीज ऑफ चैरिटी का कार्यालय। 

कैसे पहुंचे - धर्मतल्ला से बस मेट्रो और ट्राम से कालीघाट पहुंचा जा कता है। कालीघाट में कोलकाता मेट्रो का स्टेशन भी है। कालीघाट ट्राम से भी पहुंचा जा सकता है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का पुश्तैनी घर काली घाट इलाके में ही है।
मुख्य सड़क जहां आप ट्राम से उतरते हैं, कालीघाट मंदिर का विशाल प्रवेश द्वार बना हुआ है। इस सड़क पर आधा किलोमीटर चलने के बाद मां काली का मंदिर आ जाता है।

मिशनरीज ऑफ चेरिटी का मुख्यालय बगल में -  काली घाट की ही सड़क पर मदर टेरेसा की संस्था मिशनरीज आफ चेरिटी यानी निर्मल हृदय का मुख्यालय भी है। एक ओर प्रचंड रुप में कालीघाट में देवी मां यहां विराज रही हैं पर कालीघाट के मंदिर के मार्ग पर कोलकाता का सबसे पुराना रेडलाइट एरिया भी है। यहां भरी दोपहरी में भी महिलाएं अपने ग्राहकों का इंतजार करती नजर आती हैं। शक्ति की अधिष्ठात्री देवी के मंदिर के पास नारी शक्ति की ये कैसी विवशता है मां... 
 -    विद्युत प्रकाश मौर्य 
( KOLKATA, KALIGHAT, DEVI ) 

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