Thursday, September 12, 2013

गोपी तालाब - यहां गोपियों ने त्यागे थे प्राण

नटवर नागर कृष्ण के प्रेम में गोपियां दीवानी थीं। लेकिन जब कृष्ण नहीं लौटे तो हजारों गोपियों ने कृष्ण प्रेम में तालाब में समाहित होकर प्राण त्याग दिए। कान्हा की नगरी द्वारका से थोड़ी दूर पर स्थित है गोपी तालाब तीर्थ। कहा जाता है कि कृष्ण ने गोपियों को इस तालाब की पवित्र मिट्टी से स्नान करवा कर उन्हें पवित्र किया था। बाद में जब गोपियों ने कृष्ण के विरह में इस तालाब में प्राण त्याग दिए थे।
मिट्टी है चंदन समान - कृष्ण ने इस तालाब की मिट्टी को वरदान दिया कि तालाब की मिट्टी चंदन के जैसी हो जाएगी। जो भी इस मिट्टी को अपने शरीर से लेप करेगा उसे शांति मिलेगी और उसके दुख दूर होंगे। सचमुच गोपी तालाब से मिलने वाली मिट्टी चंदन सरीखी है। लोग यहां से मिट्टी लेकर जाते हैं। मंदिरों के आसपास की दुकानों में इस तालाब की मिट्टी बिकती है। इसे गोपी चंदन कहते हैं।

द्वारका और आसपास का भ्रमण वाली ज्यातर बसें श्रद्धालुओं को अपने आधे दिन के सैर सपाटा कार्यक्रम में गोपी तालाब भी लेकर जाते हैं। यहां तालाब के किनारे कई मंदिर बने बैं। इन मंदिरों में कृष्ण और गोपियों को रासलीला की झांकियां सजाई गई हैं। कई मंदिरों में भव्य प्रदर्शनियां भी लगी हैं। सभी मंदिर असली और अति प्राचीन होने का दावा करते हैं। इन मंदिरों के पुजारी श्रद्धालुओं को कृष्ण की कथा सुनाकर मंदिर में दान दक्षिणा करने का दबाव बनाते हैं। पर आप इनके चक्कर में नहीं आएं। यहां बने ज्यादातर मंदिर निजी मंदिरों की तरह हैं। इसलिए यहां दिया दान सीधे पुजारियों की जेब में जाता है। हां गोपी तालाब से आप यहां की मिट्टी यानी गोपी चंदन लेकर घर जरूर जाएं। गोपी तालाब की मिट्टी तू चंदन करके जान।
-    माधवी रंजना



Wednesday, September 11, 2013

दक्षिण भारत में हिंदी से चलता है काम

दक्षिण भारत में हिंदी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। आप दक्षिण भारत के तमाम पर्यटक स्थलों पर जाएं आपका काम हिंदी बोलकर चल सकता है। कोच्चि, त्रिवेंद्रम के होटल वाले, आटो वाले और दुकानदार हिंदी बोलते, समझते हैं। कन्याकुमारी तमिलनाडु में है लेकिन वहां हर तरफ हिंदी समझी जाती है। दुकानों के साइन बोर्ड भी हिंदी में दिखाई देते हैं। दक्षिण के राज्य तमिलनाडु के परंपरागत शहर मदुरै में रेलवे स्टेशन के बाहर होटलों के साइन बोर्ड और विजिटिंग कार्ड पर हिंदी में नाम प्रकाशित है।
मदुराई में रेलवे स्टेशन के आसपास होटलों के बाहर हिंदी में लिखा दिखाई देता है- यहां कमरे किराए पर मिलते हैं। जाहिर है यह बाजार का असर है। उत्तर भारत के ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करने की होड़ लगी है। शापिंग माल्स और शोरूम के सेल्समैन हिंदी बोलते हैं। जिन सेल्समैन को हिंदी आती है उन्हें आसानी से नौकरी मिल जाती है। मैं मदुरै एक सेल में घुसता हूं। मैं हिंदी में संवाद शुरू करता हूं। तुरंत एक हिंदी वाला सेल्समैन हाजिर हो जाता है। वह पूछता है कहिए क्या सेवा करूं। सेल्समैन ने कहा उसे चार भाषाएं आती है। इस प्लस प्वाइंट के कारण उसे वेतन ज्यादा मिलता है। वह एक नौकरी छोड़े तो कई नौकरियां उसे आफर हो जाती हैं। रामेश्वरम शहर में सारे आटो रिक्शा वाले हिंदी समझ और बोल लेते हैं।

ऊटी के बोटानिकल गार्डन में...
हिल स्टेशन ऊटी में जाकर ऐसा लगता ही नहीं कि आप किसी दक्षिण के शहर में हैं। हर दुकान, हर फुटपाथ पर सामान बेचने वाले को हिंदी आती है। होटलों के रिसेप्शन पर भी आपका काम हिंदी बोलकर चल सकता है। वहीं तिरूपति में हिंदी को लेकर कोई समस्या नहीं आती। बेंगलुरु और मैसूर में आप हिंदी बोलकर आराम से काम चला सकते हैं। दक्षिण भारत में हिंदी के प्रचार के लिए दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा कई दशक से सक्रिय है। इस संस्था को डिम्ड यूनीवर्सिटी का दर्जा है। यह कई तरह के कोर्स कराता है। लेकिन अब टेलीविजन, फिल्मों और लगातार सैलानियों की आवाजाही के कारण हिंदी का प्रसार दक्षिण में खूब हो रहा है। 

अगर अखबारों की बात करें तो बेंगलुरु से हिंदी दैनिक अखबार राजस्थान पत्रिका प्रकाशन दो दशक से हो रहा है। पत्रिका अपना चेन्नई संस्करण भी शुरू कर चुका है। साल 2012 की यात्रा में  मैंने वहां दक्षिणभारत राष्ट्रमत नामक नया अखबार देखा जो बहुत अच्छे लेआउट डिजाइन में प्रकाशित हो रहा है। यह अखबार भी बेंगलुरु के साथ चेन्नई से भी प्रकाशित होता है।



-  ----  विद्युत प्रकाश  
http://www.dbhpsabha.org/   

( (HINDI, SOUTH, KERALA, TAMILNADU )     

Tuesday, September 10, 2013

स्थानेश्वर महादेव - यहां पांडवों ने की थी शिव की पूजा

वैसे तो देश भर में शिव के कई प्रसिद्ध मंदिर है। शिव के 12 ज्योतिर्लिंग के अलावा भी कई शिव मंदिर हैं जिनका खास महत्व है। इन्हीं मंदिरों में एक है कुरूक्षेत्र स्थित स्थानेश्वर का शिव मंदिर।

स्थानेश्वर महादेव वह मंदिर है जहां पांडवों ने महाभारत के युद्ध से पहले अपने विजय की कामना करते हुए भगवान शिव की पूजा की थी। कहा जाता है कि कुरुक्षेत्र आने वाले श्रद्धालुओं की इस धार्मिक नगरी में यात्रा का पूरा पुण्य तब तक नहीं मिलता है जब तक कि वे स्थानेश्वर मंदिर में भगवान शिव के दर्शन न कर लें। यहां आने वाले शिव भक्त अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए विधिपूर्वक अभिषेक कराते हैं। पुराणों के मुताबिक सकाम या फिर निष्काम भाव से स्थाणु मंदिर में प्रवेश करने वाला मनुष्य पापों से मुक्त होकर परम पद को प्राप्त करता है।

स्थानेश्वर मंदिर से लगा हुआ एक सुंदर सरोवर भी है। कहा जाता है इस सरोवर के जलार्पण से तमाम रोग दूर हो जाते हैं। कहा जाता है कि इस सरोवर के जल के स्पर्श से राजा वेन के सारे कष्ट दूर हो गए थे। इस सरोवर में स्नान करने के लिए घाट बने हुए हैं। स्त्रियों के स्नान करने के लिए अलग से घाट बने हुए हैं।
यहां सिखों के नौंवे गुरु तेगबहादुर के आने का भी प्रकरण मिलता है। इस मंदिर से बिल्कुल सटे उनकी याद में गुरुद्वारा नवीं पातशाही बना हुआ है। कुरूक्षेत्र में इस स्थल पर शिव मंदिर और गुरुद्वारे का अनूठा संयोग दुर्लभ है। दोनों मिलकर यहां अदभुत सुरम्य वातावरण का संचार करते हैं।

कैसे पहुंचे - ये मंदिर कुरुक्षेत्र शहर में थानेश्वर से तीन किलोमीटर दूर झांसा रोड पर स्थित है। आप कुरुक्षेत्र में ब्रह्म सरोवर या पैनोरमा के आसपास से यहां जाने के लिए आटो रिक्शा करके जा सकते हैं।


भद्रकाली मंदिर – 
कुरुक्षेत्र का एक और प्रसिद्ध मंदिर है मां भद्रकाली का मंदिर। यह सती के 51 शक्ति पीठ में से एक है। भद्काली मंदिर स्थानेश्वर मंदिर से थोड़ी दूर पर ही स्थित है। कहा जाता है कि यहां भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से कटकर सती के दाहिने पाव की एड़ी कट कर गिरी थी।

 इसे सिद्ध पीठ माना जाता है और यहां दशहरे पर मेला लगता है। मंदिर परिसर में कूप है जिसमें लोगो मनोकामना पूर्ति के लिए मिट्टी के घोड़े चढ़ाते हैं। कहा जाता है कि यही वह जगह है जहां महाभारत के युद्ध से पूर्व अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण के कहने पर दुर्गा स्तोत्र का पाठ किया था।

-    माधवी रंजना 

Monday, September 9, 2013

यहां देखिए कान्हा के अनेक रूप

माखन चोर नंद किशोर मनमोहन घनश्याम रे
कितने तेरे रुप हैं कितने तेरे नाम रे
कान्हा के बहुत सारे रुप देखने हों तो कुरूक्षेत्र पहुंचिए। यहां महाभारत की लड़ाई हुई थी लेकिन कुरुक्षेत्र में बना श्रीकृष्ण संग्रहालय आपको कान्हा के कई रुपों से मिलवाता है। कुरुक्षेत्र का प्रमुख आकर्षण है श्रीकृष्ण संग्रहालय। 1991 में बना ये संग्रहालय अब भव्य रूप ले चुका है। तीन मंजिले संग्रहालय में महाभारत का मल्टीमीडिया स्वरूप देखा जा सकता है। संग्रहालय की उपर वाली मंजिल पर बने इस प्रदर्शनी में महाभारत की युद्ध भूमि का बड़ा ही विशाल स्वरूप दिखाई देता है। खास तौर पर ये बच्चों को काफी पसंद आता है।

श्रीकृष्ण संग्रहालय सालों भर खुला रहता है। यहां सातों दिन रविवार को भी जाया जा सकता है। प्रवेश का टिकट 30 रुपये का है। संग्रहालय के भवन के मुख्य भवन पर महाभारत के युद्ध में रथ पर सवार अर्जुन श्रीकृष्ण की तस्वीर है। संग्रहालय के अंदर श्रीकृष्ण को कई रूपों में देखाजा सकता है। देश के प्रमुख पेंटिंग शैली में श्रीकृष्ण की तस्वीरें यहां देखी जा सकती हैं। कांगड़ा शैली में, दक्षिण भारत के तंजौर शैली में तो मधुबनी पेटिंग में बाल गोपाल के चित्र यहां देखे जा सकते हैं। सिर्फ पेंटिंग, बल्कि मूर्तिकला, स्थापत्य कला में भी कान्हा के विविध रूप आप यहां देख सकते हैं। संग्रहालय में गीता गैलरी भी है। साथ ही धर्म का ज्ञान बढ़ाने मल्टीमीडिया में सवाल जवाब वाले रोचक कियोस्क लगाए गए हैं जो बच्चों को काफी आकर्षित करते हैं। यहां आप अभिन्यु का चक्रव्यूह भी देख सकते हैं जो काफी रोचक है। म्यूजिम के ब्लॉग पर जाएं- www.srikrishnamuseum.blogspot.in www.srikrishnamuseum.blogspot.in
म्यूजियम के परिसर में ही श्रीकृष्ण पैनोरमा बना है। यह वास्तव में साइंस सेंटर है जो सिर्फ बच्चों को बल्कि बड़ों को भी लुभाता है। यहां टेलीविजन का वर्चुअल स्टूडियो जैसी कई रोचक चीजें देखी जा सकती हैं। संग्रहालय के परिसर के बाहर विशाल पार्क भी है जहां कई तरह के रोचक खेल हैं।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य